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Friday, December 30, 2016

पीएम ने लॉन्च की BHIM एप्प : अब आपका अंगूठा बनेगा आपका बैंक- पीएम मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लकी ग्राहक योजना और डिजीधन योजना की शुरुआत की। पीएम ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में डिजीधन मेले की शुरुआत करते हुए डिजीधन मेले में पहला लकी ड्रॉ निकाला। इस दौरान उन्होंने एक नया मोबाइल एप्प लॉन्च किया, जिसका नाम भीम रखा। खास बात यह है कि ये ऐप बिना इंटरनेट के चलेगा। पीएम ने बाबा भीमराव अंबेडकर के नाम पर नया एप्प लॉन्च किया। इस एप्प का नाम भीम (BHIM) रखा गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की पूरी अर्थव्यवस्था इसी भीम ऐप के इर्द-गिर्द हो जाएगी। ये भीम एप्प दुनिया के लिए सबसे बड़ा अजूबा होगा। सारा कारोबार इसी एप्प के जरिए होगा।

ये ऐप वर्ष 2017 में लोगों के लिए बड़ा नजराना है। अब अंगूठा ही लोगों की पहचान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि लकी ग्राहक योजना के तहत 100 दिन में लाखों परिवारों को इनाम मिलेगा। जिन्हें इस लकी ड्रॉ में इनाम मिला है, उनका मैं अभिनन्दन करता हूं। डिजिटल पेमेंट करने वाले उज्जवल भारत की नींव मजबूत करने का काम कर रहे हैं। 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर मेगा ड्रॉ होगा, जिसमें करोड़ों रुपये का इनाम दिया जाएगा।

मोदी ने कहा कि देश में इस समय 100 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन हैं। दुनिया के लोग गूगल के पास जाएंगे और पूछेंगे कि ये भीम है क्या। शुरुआत में उन्हें महाभारत वाला भीम दिखेगा, पर और गहराई से अंदर जाएंगे तो उन्हें भीम दिखाई देगा। पीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि ये भीम सामान्य नहीं है। ये आपके परिवार की आर्थिक महाशक्ति बनने वाला है। उन्होंने कहा कि आशावादी लोगों के लिए मेरे पास ढेरों अवसर है।

निराशावादी लोगों के लिए कोई दवा नहीं है। पीएम ने 3 साल पहले का जिक्र करते हुए यूपीए सरकार की भी खिंचाई की। उन्होंने कहा कि पहले अखबारों में खबरें छपती थीं कि कोयला में कितना गया, टूजी में कितना गया और आज लोग कहते हैं कितना आया। आज पैसा जाने की नहीं आने की बात हो रही है, ये बदलाव है। हिन्दुस्तान बदलाव के लिए तैयार है।
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Thursday, December 29, 2016

केंद्र की सफाई 10000 के पुराने नोट रखने पर जेल नहीं, जुर्माना होगा,...

नई दिल्ली: सरकार ने चलन से बाहर किए जा चुके पुराने 500 और 1000 रपये के नोटों को किसी व्यक्ति द्वारा 10 से ज्यादा संख्या में रखे जाने को दंडनीय अपराध घोषित किया है और इस पर न्यूनतम 10,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया है पर हालांकि इसमें चार साल जेल की सजा के प्रस्ताव को छोड़ दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कल मंत्रिमंडल की बैठक में विनिर्दिष्ट नोट (दायित्व का समापन) अध्यादेश-2016 को मंजूरी प्रदान की गई थी। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति ऐसे पुराने नोटों को 10 से ज्यादा संख्या में नहीं रख सकता है। केवल शोधार्थियों और विद्वानों को ऐसे 25 नोट रखने की अनुमति इस अध्यादेश में दी गई है।
शीर्ष सूत्रों के अनुसार इस अध्यादेश को जल्द ही राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और यह 31 दिसंबर से प्रभावी होगा।
इस अध्यादेश को लाने का सरकार का मकसद 31 मार्च के 1000 और 500 रुपये के बंद किए जा चुके पुराने नोट रखने को एक दंडनीय अपराध बनाना है। इसके लिए सरकार ने न्यूनतम 10,000 रुपये या पायी गई राशि का पांच गुना जो भी ज्यादा हो जुर्माना तय किया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी के साथ एक जनवरी से 31 मार्च के बीच पुराने नोट जमा कराने पर 5,000 रुपये या राशि का पांच गुना जो भी ज्यादा हो, जुर्माना वसूला जाएगा। इसके लिए विशेष खिड़कियां खोली जाएंगी जिस पर सिर्फ नोटों को बदला जा सकेगा।
इस अध्यादेश में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन का प्रावधान है ताकि नोटबंदी को कानूनी जामा पहनाया जा सके। इससे समय के अंदर नहीं बदले गए प्रतिबंधित नोटों को लेकर केंद्रीय बैंक की देनदारी भी खत्म हो जाएगी। सरकार ने पुराने नोटों को बदलने के लिए जनता को 50 दिन का वक्त दिया था जिसकी मियाद कल समाप्त हो रही है।
गौरतलब है कि सरकार ने आठ नवंबर 2016 की मध्यरात्रि से 1000 और 500 रपये के पुराने नोटों की कानूनी मान्यता रद्द कर दी थी। इसके लिए जारी की गई अधिसूचना इन नोटों को लेकर केंद्रीय बैंक और सरकार के दायित्व को समाप्त करने के लिए काफी नहीं थी जिसके चलते यह अध्यादेश लाया गया है। साथ ही इससे सरकार को भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचने में भी मदद मिलेगी।
नोट पर केंद्रीय बैंक की ओर से धारक को कीमत अदा करने का वादा अंकित होता है। इस दायित्व को केवल कानूनी तौर पर ही खत्म किया जा सकता है और इससे पहले हर किसी को पुराने नोट बदलने का अवसर देना पड़ता है।
सूत्रों ने बताया कि चार साल कारागार की सजा के प्रावधान को अनुमति प्रदान नहीं की गई है।
सरकार को इस अध्यादेश को छह महीनों के भीतर संसद से पास कराना होगा तभी यह पूर्ण तौर पर कानून बन पाएगा। इस अध्यादेश से अब बंद हो चुके 500 और 1000 रुपये के नोटों के रूप में दस हजार रुपये से ज्यादा रखने, लेनदेन करने और ग्रहण करना दंडनीय अपराध हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार 31 मार्च तक रिजर्व बैंक के काउंटरों पर अब इन नोटों को कड़े प्रावधानों के तहत ही बदला जा सकेगा। यह सुविधा विदेश में रह रहे लोगों, सुदूरतम इलाकों में तैनात सशस्त्र बलों के जवानों और वैध कारण देने वाले लोगों को ही मिलेगी।
वर्ष 1978 में तत्कालीन मोरारजी देसाई की सरकार भी इसी तरह का अध्यादेश लायी थी जब उसने 1,000, 5,000 और 10,000 रुपये को नोटों को चलन से बाहर किया था।
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अंतिम विदाई: आज नोट जमा करने का आखिरी दिन, जानिए कौन से लोग रख सकेंगे पुराने नोट..

नई दिल्लीः बैंक शाखाओं में आपके लिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट जमा कराने के लिए शुक्रवार आखिरी दिन है. इसके बाद कुछ खास किस्म के लोगों को ही विशेष शर्तें पूरी करने के बाद ही रिजर्व बैंक में पैसा जमा कराने की सुविधा होगी. उधर, 31 तारीख को या उसके बाद तय सीमा से ज्यादा पुराने नोट रखने पर जुर्माना देना होगा.

नोटबंदी को लेकर नया अध्यादेश उन लोगों को परेशानी दे सकता है जो देश में रहते हुए भी अब तक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट नहीं जमा करा पाए हैं. अध्यादेश के जरिए सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 जनवरी या उसके बाद कौन लोग रिजर्व बैंक जाकर पैसा जमा करा सकेंगे और वो भी हलफनामा देने के बाद. प्रावधानों के मुताबिक,

वो व्यक्ति जो 9 नवम्बर से 30 दिसम्बर तक देश से बाहर रहा हो, उसे रिजर्व बैंक में हलफनामा देकर पुराने नोट जमा कराने की सुविधा मिलेगी.सरकार कुछ और किस्म के व्यक्तियों के बारे में अधिसूचना जारी करेगा और वही रिजर्व बैंक में हलफनामा देकर पैसा जमा करा सकेंगे.हलफनामे में गलत जानकारी देने पर 50 हजार रुपये या फिर जमा कराए गए नोट के पांच गुना के बराबर, जो भी ज्यादा हो, जुर्माना देना होगा.
हलफनामा देने भर से ही अधिसूचित किए गए लोगों को पैसा जमा कराने की अनुमति नहीं मिलेगी. रिजर्व बैंक जब तक जमाकर्ता की दलीलों से संतुष्ट होगा, तब तक कुल जमा कराए नोट के बराबर की कीमत बैंक खाते में दर्ज नहीं हो सकेगी. और हां, यदि रिजर्व बैंक दलीलों को खारिज कर दे तो 14 दिनों के भीतर इसके खिलाफ रिजर्व बैंक के बोर्ड के सामने अपील कर सकता है.

अध्यादेश लाने का एक मकसद पुराने नोटों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए भी उपाय बताने हैं. ये इसलिए भी जरुरी हैं, क्योंकि अभी भी कुछ जगहों पर मजदूरी देने या काले धन को सफेद करने की कोशिश में पुराने नोट का इस्तेमाल हो रहा है. इसी को ध्यान मे रखते हुए 31 दिसम्बर से या उसके बाद आम लोग ज्यादा से ज्यादा 500 और 1000 रुपये के 10 पुराने नोट अपने पास रख सकेंगे. 31 दिसम्बर के बाद शोध करने वालों को 25 पुराने नोट रखने की इजाजत होगी तय सीमा से ज्यादा नोट रखने की सूरत में 10 हजार रुपये या फिर जब्त किए नोट की कीमत के पांच गुना बराबर जुर्माना देना होगा.

अध्यादेश के जरिए 8 नवंबर को गैर कानूनी घोषित किए गए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट पर रिजर्व बैंक की जवाबदेही खत्म करने का प्रावधान है. जवाबदेही से यहां मतलब धारक को नोट पर छपी कीमत के बराबर अदा करने का आरबीआई गवर्नर की ओर से दिया गया वचन है. अध्यादेश की बदौलत अब पुराने नोट को लेकर सरकार या रिजर्व बैंक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नही की जा सकेगी.

फिलहाल, अध्यादेश के बाद बजट सत्र में विधेयक पारित कराना होगा. उम्मीद है कि विधेयक पारित होने के बाद जितने पुराने नोट रिजर्व बैंक के पास वापस नही आते हैं, उतनी कीमत के बराबर रकम सरकारी खजाने में पहुंच सकेगी.

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