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Monday, March 20, 2017

बुन्देलखंड के स्वतंत्र देव सिंह बने राज्यमंत्री, जानें कौन है स्वतंत्र देव सिंह ? बिना विधायक बने कैसे बने मंत्री ?

लखनऊ। योगी आदित्य नाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। दो डिप्टी सीएम के साथ ही 40 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। सीएम पद की दौड़ में शामिल रहे स्वतंत्र देव सिंह को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली।

जब राज्यपाल ने योगी के मंत्री को शपथ ग्रहण के बाद रोक लिया
इस दौरान एक वाकया ऐसा हुआ जिसे देखकर वहां लोग मुस्कुरा दिए। दरअसल जिस वक्त स्वतंत्र देव सिंह ने राज्यमंत्री की शपथ ली और उसके बाद वह योगी आदित्यनाथ की ओर उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे तो राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें रोक लिया, उन्होंने कहा कि हमसे नहीं मिलेंगे, जिसके बाद स्वतंत्रदेव सिंह वापस राज्यपाल के पास लौटे और उनसे हाथ मिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। जिसके बाद राम नाईक ने उनसे मुस्कुराकर हाथ मिलाया। आपको बता दें कि शनिवार को योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था, विधायक दल की बैठक के बाद योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा वेंकैया नायडू ने मीडिया के सामने की, उनके साथ ही दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। योगी सरकार में 23 विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार व 15 राज्यमंत्री बनाए गए हैं।

 राजनीतिक सफर
1986- आरएसएस प्रचारक बने.
1988-89-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री.
1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी.
1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी.
1996-युवा मोर्चा का महामन्त्री.
1998- फिर से भाजपा युवा मोर्चा का महामंत्री.
2001- भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष.
2004- विधान परिषद के सदस्य.
2004 प्रदेश महामंत्री बने.
2004 से 2014 तक दो बार प्रदेश महामंत्री.
2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बने.
2012- से अभी तक महामंत्री बने हुए.

पत्रकारिता में अाजमाया हाथ

 उत्तर प्रदेश में सीएम पद के दावेदारों में शामिल हुए बीजेपी के नेता स्वतंत्र देव सिंह कभी पत्रकारिता भी किया करते थे। छात्र राजनीति के बीच वह 1989-90 में स्वतंत्र भारत नामक अख़बार से जुड़े। बुंदेलखंड के छोटे से जिले उरई में वह इस अखबार के संवाददाता के तौर पर काम करते थे, लेकिन पत्रकार के तौर पर वह सफल नहीं हुए। कॉलेज में छात्र संघ चुनाव हारे। 2012 में एमएलए इलेक्शन भी बुरी तरह से हारे।


विस्तृत में...
उतार चढ़ाव भरा र‍हा राजनीतिक सफर

  • यूपी में सीएम पद के दावेदार स्वतंत्र देव सिंह एक बार एमएलसी ज़रूर बने। उनके नाम की खूब चर्चा हुई, लेकिन बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का सीएम बना दिया। 
  •  स्वतंत्र देव सिंह का राजनैतिक इतिहास बेहद उतार चढ़ाव भरा रहा है। स्वतंत्र देव सिंह बेहद गरीबी में पले-बढ़े। छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़े, लेकिन कभी भी करिश्माई सफलता नहीं मिली। इसके बाद भी वह एबीवीपी से जुड़े रहे। 
  • स्वतंत्र देव सिंह बुंदेलखंड के उरई से आते हैं। लेकिन वह मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाले हैं। वह 1984 में अपने भाई शिवदान सिंह के साथ उरई आये थे। शिवदान सिंह पुलिस विभाग में तबादले के कारण यहां आए। स्वतंत्र देव सिंह भी अपने भाई के साथ यहां आ गए।
  • यहां से इनका राजनैतिक जीवन शुरू हुआ। 1985 में ग्रेजुएशन में दाखिले के बाद 1986 में स्वतंत्र देव सिंह ने उरई के डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ इलेक्शन लड़ा लेकिन हार गए।

       ऐसे हुई राजनीति में इंट्री

  • कॉलेज से निकलने के बाद स्वतंत्र देव सिंह उरई में ही रहते हुए 1989 में ‘स्वतंत्र भारत’ नामक अखबार में बतौर जिला संवाददाता काम करना शुरू कर दिया।
  • उन्होंने इसमें करीब तीन साल तक काम किया। कभी स्वतंत्र देव सिंह के साथ रहे उरई के सीनियर जर्नलिस्ट बताते हैं कि स्वतंत्र देव सिंह ने तब के उभरते हिंदूवादी नेता विनय कटियार का इंटरव्यू अखबार में पब्लिश करा दिया। इससे वह विनय कटियार के करीबी हो गये। 1992 में उन्होंने पूरी तरह से पत्रकारिता छोड़ दी. वह संगठन में कार्यकर्ता के रूप में उरई से झांसी आ गए।
  • अब तक स्वतंत्र देव सिंह का नाम कांग्रेस सिंह था. संघ को बहुत कन्फ्यूज़न होता था। संघ में उनका नाम स्वतंत्र देव सिंह रख दिया गया।
  • यह नाम स्वतंत्र भारत अखबार से प्रेरित था, जिसमें कांग्रेस सिंह काम किया करते थे।
  • इस तरह उन्हें स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जाना जाने लगा।
  • झांसी में एबीवीपी में शामिल हुए। उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें कानपुर भेज दिया गया
  • कानपुर में वह हनुमान मिश्रा के नेतृत्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ खड़े हो गए।
  • 2000 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। 
  • इसी दौरान उनके नेतृत्व में आगरा में हुए पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन उनका राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से अच्छा परिचय हुआ।
  • इसका इनाम ये मिला कि उन्हें युवा मोर्चा से मुख्यधारा में लाते हुए पार्टी ने यूपी का महामंत्री बना दिया गया।
  • उन्हें उरई में सहकारी समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया।
2012 में हुई जमानत जब्त
  • 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह को उरई की कालपी सीट से चुनाव लड़े। यहां उन्हें बुरी तरह हार मिली।
  • कांग्रेस की प्रत्याशी उमा कांति के सामने उनकी जमानत तक जब्त हो गयी। इसके बाद भी उन्हें बीजेपी ने एमएलसी बनाया।
  • 2014 में हुए आम चुनाव उनके लिए महत्त्वपूर्ण रहे। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में होने वाली रैलियों के आयोजन की कमान दे दी।
  • यहीं से वह पीएम मोदी व अमित शाह के और करीब आ गए। बुंदेलखंड में मजबूत पकड़ के चलते 19 में से अधिकतर सीटों पर टिकट उनकी सलाह पर ही दिए गए। बीजेपी ने यहां से सभी 19 सीटें जीती तो उनका कद और बढ़ गया।

पीएम मोदी के काफी करीबी


स्वतंत्र देव सिंह पीएम मोदी के काफी करीबी हैं. उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है.लोकसभा चुनाव से लेकर यूपी विधानसभा चुनाव तक पीएम मोदी की सभी रैलियों को सफल बनाने का जिम्मा उन्हीं के पास था और अपनी संगठन क्षमता को उन्होंने साबित भी किया है.

वह एक बार एमएलसी भी रह चुके हैं. आरएसएस स्वयंसेवक रहे स्वतंत्र देव सिंह की छवि काफी ईमानदार है. इतने सालों से राजनीति में रहे स्वतंत्र देव के पास संपत्ति के नाम पर एक ही दोपहिया वाहन है.

कुशल संगठनकर्ता के रूप में पहचान

स्वतंत्र देव सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की रैली को सफल बनाने के लिए शहरों में जाकर वहीं काम जमीन में जुड़कर काम करने लगते थे. उनके पास बूथ से लेकर मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं की जानकारी रखते हैं. 

अनुशासनप्रिय नेता


स्वतंत्र देव सिंह की बैठक में सभी कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ जाना होता है. वह किसी से भी बूथ स्तर तक की जानकारी मांग सकते हैं. उनकी कार्यशैली के हिसाब से वह पीएम मोदी को काफी जंचते हैं

सीएम के दौड़ में थे शामि‍ल

- पिछड़ा वर्ग से आने के कारण स्वतंत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश का सीएम के पद का दावेदार माना गया।
- लेकिन बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को सीएम बना दिया।
- उरई के जर्नलिस्ट केपी सिंह बताते हैं कि स्वतंत्र देव सिंह भले ही चुनाव हारते रहे लेकिन सेवा भाव व नर्म स्वभाव के कारण एबीवीपी, संघ, व बीजेपी में जगह बनाते रहे और सीएम के नाम की चर्चा तक पहुंच गए।

उरई के लोगों में निराशा

- उरई में लोग चाहते थे कि स्वतंत्र देव सिंह सीएम बनें। इसके लिए उरई के संस्कृत महाविद्यालय के अंदर बने शिव मंदिर में स्वतंत्रदेव सिंह को सीएम बनाए जाने के लिए पांच दिन से मंत्रोच्चारण चल रहा था। संस्कृत महाविद्यालय के टीचर पूनेंद्र मिश्र कहते हैं कि वह चाहते थे स्वतंत्र देव सिंह सीएम बनें। स्वतंत्र देव सिंह को आगे भी इसी तरह मेहनत जारी रखने होगी।
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Wednesday, January 27, 2016

बुन्देलखण्ड को सीएम ने दी सौगात, पढ़े पूरी खबर !

 जालौन।मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली और जालौन जनपद के किसानों को 40 नलकूप व 10 बिजलीघरों की सौगात दी। सीएम ने कहा मई से ऐसी पुलिसिंग देखने को मिलेगी कि 100 नंबर पर डायल करते ही 10 मिनट में पुलिस आपके पास मदद को पहुंच जाएगी। 108 परियोजना का लोकार्पण और उद्घाटन करने के साथ उन्होंने बसपा और भाजपा पर खूब तंज कसे। उन्होंने कहा केन्द्र से कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
सूखे और पिछड़ेपन की मार सहन कर रहे बुंदेलखण्ड की त्रासदी के जरिए सरकार पर निशाना साधने की विपक्ष की व्यूह रचना के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह इलाका उनकी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है।
 अखिलेश ने बुंदेलखण्ड क्षेत्र में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सपा के चुनावी अभियान की शुरूआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी भाजपा और बहुजन समाज पार्टी बसपा पर हमला किया और मतदाताओं को उनकी 'साजिशों के प्रति आगाह भी किया। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित एक जनसभा में कहा ''यह चुनाव का साल है और साजिशों का साल भी। इनसे होशियार रहने की जरूरत है। बताओ कितने मुख्यमंत्री बुंदेलखण्ड आए हैं......बुंदेलखण्ड हमारी सरकार की प्राथमिकता रहा है और आगे भी रहेगा।
 वर्ष 2017 के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बुंदेलखण्ड में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के बीच अखिलेश ने कहा कि उनकी सरकार इस क्षेत्र में खड़ी समस्याओं के निदान के लिए हर सम्भव प्रयास करेगी। उन्होंने केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा ''उत्तर प्रदेश ने भाजपा को इतनी बड़ी संख्या में सांसद दिए, लेकिन बदले में उन्होंने प्रदेश को कुछ नहीं दिया। सचाई तो यह है कि योजना आयोग और नीति आयोग के मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश को नुकसान उठाना पड़ा है।
 बसपा पर प्रहार करते हुए अखिलेश ने कहा ''हाथी :बसपा का चुनाव निशान: की पार्टी तो सारा धन पत्थर के स्मारकों और हथियों को बनवाने में खर्च करती थी। ऐसे हाथी जो चल नहीं सकते। अखिलेश का मतलब पूर्ववर्ती मायावती सरकार के कार्यकाल में बनवाए गए स्मारकों और मूर्तियों से था। उत्तर प्रदेश के सात जिलों बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, झांसी, जालौन और ललितपुर तक फैले बुंदेलखण्ड में जनगणना 2011 के मुताबिक एक करोड़ 83 लाख लोग रहते हैं। यह इलाका सूखे और बेमौसम बारिश के कारण फसलें बरबाद होने से बेजार है।
 अखिलेश का यह दौरा हाल में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की बुंंदेलखण्ड यात्रा के बाद हुआ है। इस दौरान राहुल ने केन्द्र के साथ-साथ प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा था।
 मुख्यमंत्री ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के 'शाही जन्मदिन समारोह पर जनता का धन लुटाने के बसपा प्रमुख मायावती के आरोप के बारे में कहा ''मैंने अपनी बुआ :मायावती: की उस टिप्पणी का पहले ही जवाब दे दिया था कि मुख्यमंत्री नहीं बल्कि नेताजी का बेटा अपने पिता का जन्मदिन मनाता है।

मुख्यमंत्री ने मृतक पत्रकार को 20 लाख देने की घोषणा


मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोक निर्माण विभाग के राजकीय गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुये कहा कि पत्रकारों की हर संभव मदद की जायेगी। उन्होने गत माह सड़क दुर्घटना में मौत हुये अजय कुमार द्विवेदी को 20 लाख रूपये की सहायता उपलब्ध कराये जाने की घोषणा की है। उन्होने कहा कि विपक्ष के लोगों का सही काम और सही योजनाएं भी अच्छी नहीं लगती।
गाजीपुर में तैराक खिलाड़ी द्वारा आत्महत्या किये जाने के मामले पर कार्यवाही किये जाने की बात कही है। उन्होने कहा कि सरकार किसानों को सूखा के समय हरसंभव मदद देगी और बजट की कमी नहीं होगी। उन्होने कहा कि डाॅक्टर्स की कमी है। जिन्हें पूरा किया जायेगा। किसानेां की सिंचाई, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आदि योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिये सरकार प्रयासरत है। पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर देते हुये कहा कि सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है। बसपा, भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को सरकार की लाभकारी योजनाएं नही दिखाई दे रही है बल्कि विरोध करना उनका मकसद है।
उनका कहना है कि भारत सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को किसी भी प्रकार की मदद नहीं दी है। उन्होने कहा कि महिलाओं की समाजवादी पेंशन उनके सीधे खाते में भेजे जाने और बालू ट्रकों की ओवर लोडिंग बंद कराये जाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये है। उन्होने कहा कि बुंदेलखंड में विकास के लिये समाजवादी सरकार का खजाना खुला है।
विद्युत आपूर्ति से नाराज मुख्यमंत्री-उच्चाधिकारी आयेगें
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोक निर्माण विभाग के राजकीय गेस्ट हाउस में विद्युत विभाग की आपूर्ति पर असंतोष व्यक्त करते हुये अधिशाषी अभियंता विद्युत के प्रति नाराजगी जताते हुये कहा कि लखनऊ आकर स्थिति स्पष्ट करें और विद्युत आपूर्ति के संबंध में विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को हमीरपुर जनपद भेजकर विद्युत समस्याओं को दूर कराया जायेगा।
पुलिस ने दौड़ाकर पीटा जनता को-कफ्र्यू जैसे हालात-बस स्टाप में सन्नाटा
मुख्यमंत्री के आगमन पर कफ्र्यू जैसे हालात पुलिस अधिकारियों ने पैदा कर दिये। डिय्टी में तैनात पुलिस अधिकारियों ने जनता को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना लाठियाना शुरू कर दिया जिससे भगदड़ मच गयी। बदनपुर से लेकर लक्ष्मीबाई तिराहे तक सारी दुकानें बंद घंटों पहले करा देने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है। रोडवेज डिपों में बस को सन्नाटा होने के कारण यात्रियो को एक किलों दूर चलकर यात्रा करनी पड़ी है। मुख्यमंत्री के आने से लोगों को भारी परेशानी से जूझना पडा है।
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