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Thursday, December 17, 2015

टीईटी-15 का सर्वर धड़ाम, आवेदक परेशान

इलाहाबाद : टीईटी-15 की वेबसाइट का सर्वर खराब होने से आवेदक परेशान हैं। वेबसाइट की समस्या देखते हुए ही रजिस्ट्रेशन, फीस जमा करने, अंतिम रूप से फार्म जमा करने और त्रुटि में संशोधन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है लेकिन अभ्यर्थी साइबर कैफे व घरों में कम्प्यूटर के सामने घंटों रातों परेशान रहे। लेकिन फार्म नही भर  सके.

टीईटी-15 की वेबसाइट www.upbasiceduboard.gov.in फार्म भरने के दौरान ही बंद हो जा रही है। मेरठ के सौरभ, आगरा के बृजकिशोर, इलाहाबाद के अमित श्रीवास्तव, महोबा से नितिन कुमार पाराशर, बस्ती से रविन्द्र यादव, आदि गुरुवार को दिनभर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की कोशिश करते रहे लेकिन सफलता नहीं मिली।

वही शिक्षामित्र के लिए ये सुनहरे मौके का फायदा उठाने के लिए परेशान है, मथुरा के फरह टाउन से राम निवास शर्मा, प्रभा पचौरी जो की शिक्षामित्र है काफी परेशान होने के बाद भी फार्म नही भर सके.

पौने दो साल बाद प्रदेश में होने जा रही परीक्षा कोई छोड़ना नहीं चाहता। अभ्यर्थी वेबसाइट डाउन होने से खासे परेशान हैं। वहीं, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी नीना श्रीवास्तव का कहना है कि वेबसाइट सही है। बुधवार से गुरुवार के बीच एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने वेबसाइट के जरिए फीस जमा की है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुक्रवार शाम छह बजे तक होगा। दो फरवरी को प्रस्तावित परीक्षा के लिए लगभग 12 लाख अभ्यर्थी पंजीकरण करा चुके हैं। 
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मुख्यमंत्री ने 5949 करोड़ की परियोजनाओं का किया शिलान्यास

गोरखपुर : विश्वविद्यालय परिसर में बोल रहे हैं। यहां विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं और मीडियाकर्मी भी। झूठ और सच सब जानते हैं। हम विकास चाहते हैं। विकास की ही बात करते हैं। हम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर कुछ नहीं कहेंगे। प्रदेश का विकास कौन रोक रहा है। हमे शिकायत नहीं है लेकिन यूपी सरकार के काम को कौन रोक रहा है, यह जनता जान रही है। 

यह कहना है प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव का। गुरुवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव काफी हमलावर दिखे। उन्होंने समाजवादियों को आगाह करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्य हो रहे हैं। जनहित की योजनाएं लागू हो रही हैं। जरूरी है कि हम इसे जन-जन को बताएं। हम विकास पर बहस चाहते हैं। उनके मुद्दे हर छह माह पर बदल जाते हैं। हम इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बात करेंगे तो वे लव जिहाद और खाने-पीने का मुद्दा उछाल देंगे। हम लैपटाप बांट रहे थे तो उसे झुनझुना बताने वाले अब डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आंकड़ों पर गौर करेंगे तो मालूम होगा कि पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस ही नहीं कैंसर से मरने वालों की भी संख्या अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। पूर्वांचल के कैंसर पीड़ितों की प्रदेश सरकार ने अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक मदद की है। हमने अपनी तरफ से गोरखपुर में ही एम्स को ओके किया है। हम जमीन दे रहे हैं, फोरलेन दे रहे हैं, बिजली दे रहे हैं। फरवरी में बजट आ रहा है हम हर सुविधा देने को तैयार हैं। केंद्र सरकार बजट दे और एम्स का निर्माण कराए। हम लखनऊ से बलिया तक (326 किमी) देश में सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे बनवा रहे हैं। गोरखपुर अभी बहुत बड़ा शहर नहीं है। बावजूद यहां जाम की समस्या है। कूड़े की समस्या है। इन समस्याओं को हम दूर कराने की बात कर रहे हैं। अब तक उत्तर प्रदेश को उल्टा प्रदेश कहने वाले मजबूर होकर अब कहने लगे हैं कि यहां विकास की गति तेज हुई है। कई प्रदेशों को हमने पीछे छोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने कामकाज को सही ढहराने के लिए एक से बढ़कर एक तर्क रखा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में प्रदूषण पर बहस चल रही है। इस गंभीर चिंता को दूर भगाने की राह हमारे पास है। हम आज यहां साइकिल बांट रहे हैं। ये साइकिल श्रमिक चलाएंगे। यही काम हर कोई करने लगे तो देश भर से प्रदूषण कम हो जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और मेहनतकश लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। वे काम करने के लिए मीलों पैदल जाते हैं। सपा सरकार उनकी राह आसान करने के लिए साइकिल बांट रही है। हमारी सरकार जो भी करती है जनहित में करती है। दूसरी पार्टियों के लोग गोरक्षा का दावा करते हैं और उसे लेकर धरना-प्रदर्शन करते हैं। हमारी सरकार तो गाय की संख्या बढ़ाने में पूरे देश में नम्बर एक है। आज स्थिति का आकलन करा लिया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश में सर्वाधिक दूध गुजरात नहीं अब यूपी में हो रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका सुबूत है कि उत्तर प्रदेश में मदर डेयरी और अमूल जैसी कम्पनियां प्लांट लगा रही हैं। हमारी सरकार ने पराग को और उच्चीकृत करने फैसला लिया है। अब समितियों के जरिए दूध देने वाले गोपालकों के खाते में उसी दिन धन चला जाएगा। उन्हें दूध की कीमत पाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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