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Tuesday, July 25, 2017

यूपी दरोगा भर्ती : 25 व 26 जुलाई की परीक्षा रद्द, परीक्षा का पेपर लीक, जानें नई डेट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सब इंस्पेक्टर, नागरिक पुलिस (पुरुष-महिला) और समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2016 के तहत 25 और 26 जुलाई 2017 को होने वाली ऑनलाइन परीक्षा तकनीकी कारणों से रद्द कर दी गई है। हालांकि, बोर्ड ने परीक्षा स्थगित करने का कारण तकनीकी बताया है। सोमवार को सुबह ही वॉट्सऐप के जरिए पेपर लीक होने की बात सामने आ रही है।

बोर्ड के चेयरमैन क्या कहा ?
बोर्ड के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पुलिस में दारोगा और उसके समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती के लिए 25 जुलाई और 26 जुलाई की ऑनलाइन परीक्षा (सीबीटी) अपरिहार्य तकनीकी कारणों से अगले आदेशों तक स्थगित की जा रही है। परीक्षा की अगली तारीखें बोर्ड जल्द से जल्द बोर्ड वेबसाइट http:uppbpb.gov.in के जरिए जारी करेगा।

13 जुलाई से चल रही है परीक्षा
उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा पद पर सीधी भर्ती के लिए रिक्त 3307 पदों पर इस बार उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने ऑन लाइन परीक्षा का फैसला किया था। ऑनलाइन परीक्षा 13 जुलाई से शुरू हुई थी, जो 31 जुलाई तक होनी है। 3307 पदों में पुरुषों के लिए 2400 पद, महिलाओं के लिए 600 पद, पीएसी के प्लाटून कमांडर के लिए 210 पद और अग्निश्मन अधिकारी के 97 पद थे।



विस्तृत में...
3307 पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया

  • उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के चेयरमैन विरेंद्र कुमार ने बताया कि तकनीकी कारणों से मंगलवार और बुधवार को होने वाली परीक्षा स्थगित की गई है।
  • उन्होंने पेपर लीक होने की बात से इंकार किया है।
  • हालांकि कहा जा रहा है कि जो पेपर 25 और 26 जुलाई को आनलाइन होने थे वह पेपर एक दिन पहले ही व्हाट्स एप के माध्यम से कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंच गया।
  • इसकी जानकारी जब भर्ती बोर्ड के अधिकारियों को हुई तो हड़कंप मच गया।
  • सूत्रों की मानें तो आनलाइन पेपर के सवाल आउट होने की जानकारी भर्ती बोर्ड केअधिकारियों को सुबह ही हो गई थी।
  • इसके बाद अधिकारियों ने मैराथन मीटिंग कर इस पर मंथन किया और अंत में इस परीक्षा को स्थगित करके बाद में परीक्षा कराए जाने की बात तय हुई।
  • बोर्ड के चेयर मैन ने बताया कि 22 जिलों में यह परीक्षा चल रही है।
  • मंगलवार और बुधवार को एक लाख 20 हजार छात्रों को इस परीक्षा में शामिल होना था।
  • आनलाइन परीक्षा स्थगित होने की सूचना विभिन्न माध्यमों से अभ्यर्थियों को दी जा रही है।
  • गौरतलब है कि दरोगा भर्ती 2016 के लिए 3307 पदों के लिए यह प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 17 जुलाई से 31 जुलाई के बीच आनलाइन परीक्षा संपन्न कराई जानी थी।
  • सीधी भर्ती (daroga bharti) 2016 के तहत होने वाली इन परीक्षाओं में नागरिक पुलिस में पुरुष के लिए 2400 पद, महिलाओं के लिए 600 पद, पीएसी के प्लाटून कमांडर के लिए 210 पद और अग्निश्मन अधिकारी के 97 पदों के लिए आवेदन किए गए थे।
इन 3307 पदों के लिए बीस लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था, जिनमें बोर्ड ने करीब नौ लाख आवेदकों को ऑन लाइन परीक्षा के लिए आमंत्रित किया था। दारोगा पद के लिए हो रही ऑनलाइन परीक्षा के लिए प्रदेश के 22 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। एक दिन में करीब साठ हजार आवेदक परीक्षा दे रहे हैं। 25 और 26 जुलाई को 1.20 लाख आवेदकों को परीक्षा देनी थी।

UP Police SI Exam 2017 Cancelled – Check details
UP Police Recruitment Board has started Online application process for sub-inspector posts. UP Police has announced 2707 vacancies for sub-inspector male and 600 posts for SI Female totaling to 3307 posts.UP Police has also announced 760 vacancies for Sub Inspector SI (confidential), Assistant Sub inspector ASI (ministerial) and assistant Sub inspector ASI (Accounts) Male and Female posts.

UP Police SI Exam 2017

The exam for UP Police SI is scheduled from 17th to 31st July. The exam will be conducted in various shifts.

UP Police SI Exam Cancelled for 25th and 26th July 2017

There has been an official notice today stating that the exam is cancelled and new dates will be intimated to the candidates soon. The new dates will be available on the official website.


Why UP Police SI Exam 2017 Cancelled?

The exam scheduled for 25th and 26th July is cancelled due to unavoidable technical fault. The detail is not released.

The cancellation notice has caused inconvenience to many candidates.  We will bring you more updates on UP SI exam 2017. Stay tuned.
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Wednesday, April 26, 2017

योगी सरकार ने 84 IAS, 54 IPS और 9 PCS अफसरों का किया तबादला, जानें कौन हैं 62 जिलों के नये डीएम

लखनऊ। योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. यूपी सरकार ने 84 आईएएस और 54 आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर कर दिया है. कई जिलों के डीएम का भी तबादला किया गया है. इसके साथ ही 9 पीसीएस अधिकारियों का भी तबादला हुआ है.

इससे पहले सरकार ने प्रदेश के डीजीपी जावीद अहमद को हटाकर सुलखान सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी थी. पिछले शुक्रवार को ही सरकार ने 12 पीसीएस अधिकारियों का तबादला किया था.
इससे पहले एक बार 41 और एक बार 20 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया जा चुका है. अपराधियों से सांठगांठ के शक में 625 पुलिसकर्मियों का तबादला भी योगी सरकार कर चुकी है.

84 आईएएस अफसरों के तबादले की पूरी सूची 

उत्तर प्रदेश में 84 आईएएस अफसरों के तबादले की सूची में विवेक वार्ष्णेय विशेष सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन, विशाख जी डीएम भदोही बनाए गए. मन्नान अख्तर डीएम हमीपुर बनाए गए.

डॉ. आदर्श सिंह विशेष सचिव मुख्यमंत्री, शरद कुमार सिंह डीएम प्रतापगढ़ बनाए गए, प्रकाश बिंदु विशेष सचिव परिवहन विभाग, रवींद्र कुमार डीएम फर्रुखाबाद बनाए गए, हृदय शंकर तिवारी मुख्य कार्यपालिका अधिकारी स्वास्थ्य बीमा योजना और भवानी सिंह खंगौरौत डीएम बागपत बनाए गए.

अनुज कुमार झा आयुक्त मनरेगा यूपी बनाए गए, अभय जिलाधिकारी रायबरेली बनाए गए, शंभू कुमार विशेष सचिव शिक्षा विभाग बनाए गए, आंद्रा वामसी डीएम कुशीनगर बनाए गए. अबरार अहमद विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा विभाग और सुजीत कुमार डीएम देवरिया बनाए गए.

इंद्र कुमार सिंह डीएम शामली बनाए गए, अनिल धीगरा विशेष सचिव वित्त विभाग, कृष्णा करुणेश डीएम हापुड़ बनाए गए, मासूम अली सरवर विशेष सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार और शीतल वर्मा को पीलीभीत का डीएम बनाया गया.

कुमार प्रशांत अपर आयुक्त वाणिज्य कर नोएडा, हेमंत कुमार डीएम चंदौली बनाए गए, निखिल चंद्र शुक्ला अपर मिशन निदेशक एनएचएम और ऋषिरेंद्र कुमार डीएम मऊ बनाए गए.

महेंद्र बहादुर सिंह विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, सूर्यपाल गंगवार विशेष सचिव नागरिक उड्यन विभाग, कुणाल सिलकू डीएम सिद्धार्थनगर बनाए गए, नीतीश कुमार अपर निबंधक सहकारी समितियां और दीपक मीणा डीएम श्रावस्ती बनाए गए.

अविनाश कृष्ण सिंह नियंत्रक विधिक मान विज्ञान यूपी, अमित कुमार सिंह हाथरस के डीएम बनाए गए, भवनाथ विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त, चंद्र भूषण सिंह अपर आबकारी आयुक्त,अशोक चंद्र विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त, भानु चंद्र गोस्वामी विशेष सचिव नियोजन विभाग, राजेश प्रकाश अपर आयुक्त राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, राम विशाल मिश्र विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग और राकेश कुमार मिश्रा डीएम बलरामपुर बनाए गए.

श्याम नारायण त्रिपाठी सदस्य राजस्व परिषद, रजनीश गुप्ता-निदेशक राज्य कृषि उत्पाद मंडी परिषद का अतिरिक्त प्रभार, अरविंद कुमार-प्रमुख सचिव सहकारिता एवं निबंधन, हरिराज किशोर-अपर मुख्य सचिव, कनक त्रिपाठी-विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन परती भूमि, राज प्रताप सिंह-अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा अतिरिक्त प्रभार और कामरान रिजवी-आयुक्त ग्राम विकास का अतिरिक्त चार्ज हटा.
नीना शर्मा-आयुक्त ग्राम विकास यूपी, मृत्युंजय कुमार नारायण सचिव मुख्यमंत्री, राज्य संपत्ति, मृत्युंजय कुमार को नागरिक उड्डयन का भी चार्ज, धीरज साहू-आबकारी आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज, मनोज मिश्रा-सचिव संस्कृति विभाग निदेशक संस्कृति, केधन लक्ष्मी-अपर स्थानिक आयुक्त और कर्ण सिंह चौहान-जिलाधिकारी झांसी.

शमीम अहमद खान-विशेष सचिव नगर विकास नगरीय रोजगार, सेल्वा कुमार जे-जिलाधिकारी इटावा, मदनपाल जिलाधिकारी फतेहपुर, चंद्रपाल सिंह विशेष सचिव गोपन विभाग, यशवंत राव-जिलाधिकारी मैनपुरी, डॉ नितिन बंसल-मिशन निदेशक राजकीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अरविंद मलप्पा बंगारी-जिलाधिकारी मथुरा.

जगदीश-विशेष सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन,जगदीश प्रसाद-जिलाधिकारी कन्नौज, आन्जनेय कुमार सिंह-अपर आयुक्त वाणिज्य कर, डॉ. रौशन जैकब-जिलाधिकारी बुलंदशहर, अखिलेश तिवारी जिलाधिकारी बाराबंकी और सुरेश कुमार सिंह-सीईओ ग्रामीण सड़क प्राधिकरण बनाए गए हैं.
योगी सरकार में सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल में 38 जिलों के डीएम हटाए गए.

कौशलराज शर्मा लखनऊ के नए डीएम, शुभ्रा सक्सेना-जिलाधिकारी हरदोई, नवनीत सिंह चहल-जिलाधिकारी अमरोहा, अमृत त्रिपाठी-विशेष सचिव राष्ट्रीय एकीकरण विभाग, डॉ सारिका मोहन-डीएम सीतापुर बनाई गईं.

निधि केसरवानी-विशेष सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मिनीस्ती एस-डीएम गाजियाबाद, मो. शफकत कमाल-विशेष सचिव ग्रामीण अभियंत्रण, नागेंद्र प्रसाद सिंह-डीएम सहारनपुर, बृजेश नारायण सिंह-डीएम गौतमबुद्धनगर, पवन कुमार विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा, अनीता श्रीवास्तव-डीएम बदायूं, जुहेर बिन सगीर-विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा और राकेश कुमार सिंह द्वितीय-डीएम मुरादाबाद.

दिनेश कुमार सिंह-विशेष सचिव गृह विभाग, जीएस प्रियदर्शी-डीएम मुजफ्फरनगर, सुरेंद्र सिंह-डीएम कानपुर नगर, पिंकी जोवेल-डीएम बरेली, डॉ राजशेखर-विशेष सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं निदेशक और शिवसहाय अवस्थी-डीएम रामपुर बनाए गए.



54 आईपीएस अफसरों के तबादले की पूरी सूची - 

उत्तर प्रदेश में 54 आईपीएस अफसरों के तबादले भी किए गए. इसके तहत दीपक कुमार लखनऊ के नए एसएसपी बनाए गए और मंजिल सैनी नोएडा पीएसी में भेजी गईं.

सहारनपुर के एसएसपी लव कुमार हटाए गए. राजेश एस एसपी मैनपुरी बनाए गए. घुले सुशील चंद्रभान एसपी हाथरस बनाए गए. मुनिराज जी एसएसपी बुलंदशहर बनाए गए.

सुभाष चंद्र दुबे एसएसपी सहारनपुर बनाए गए. संतोष कुमार मिश्र एसपी अमरोह बनाए गए. लव कुमार एसएसपी नोएडा बनाए गए. आरपी पाण्डेय एसएसपी गोरखपुर बनाए गए. श्रीपर्णा गांगुली एसपी देवरिया बनाई गई. हेमराज मीना एसपी संत कबीरनगर बनाए गए.

अभिषेक सिंह एसपी बलरामपुर बनाए गए. सत्येंद्र कुमार एसपी सिद्धार्थनगर बनाए गए. सुशील कुमार सक्सेना एसपी बहराइच बनाए गए. यमुना प्रसाद एसपी कुशीनगर बनाए गए.

विजय ढुल एसपी श्रावस्ती बनाए गए. हरि नारायण सिंह एसपी गाजियाबाद बनाए गए. शिवा शिम्पी चनप्पा एसपी लखीमपुर खीरी और गौरव सिंह एसपी रायबरेली बनाए गए.

मृगेंद्र सिंह एसपी सीतापुर बनाए गए. रोहन पी कनय सुल्तानपुर के एसपी बनाए गए. शैलेश कुमार पाण्डेय एसपी जौनपुर बनाए गए और सोमेन वर्मा एसएसपी गाजीपुर बनाए गए.

सुजाता सिंह एसपी बलिया बनाई गईं. अभिषेक यादव एसपी मऊ बनाए गए. आशीष तिवारी एसपी मिर्जापुर बनाए गए. शचींद्र पटेल एसपी भदोही बनाए गए. हरिश्चंद्र एसपी कन्नौज बनाए गए. संकल्प शर्मा एसपी बस्ती बनाए गए. कवींद्र प्रताप सिंह एसपी फतेहपुर बनाए गए.

प्रभाकर चौधरी एसपी एटीएस लखनऊ, दिनेश पाल सिंह एसपी कानपुर देहात, और राम प्रताप सिंह एसपी सोनभद्र बनाए गए. प्रताप गोपेंद्र यादव एसपी चित्रकूट बनाए गए. शगुन गौतम एसपी प्रतापगढ़ बनाए गए.
दिनेश चंद्र दुबे एसएसपी आगरा बनाए गए. विपिन कुमार मिश्र एसपी हरदोई बनाए गए. विपिन टांडा एसपी शाहजहांपुर बनाए गए और श्री प्रकाश चंद्र एसएसपी बदायूं बनाए गए.

आशीष कुमार एसपी नगर मुरादाबाद, अनुराग वत्स एसपी उत्तरी लखनऊ, आकाश तोमर एसपी नगर गाजियाबाद, अनुराग आर्य एसपी पूर्वी कानपुर नगर, गौरव ग्रोवर एसपी पश्चिम कानपुर नगर, सुनीति एसपी देहात नोएडा और रोहित सिंह सजवान एसपी सिटी बरेली बनाए गए.

अमित कुमार एसपी देहात वाराणसी, सतीश कुमार एसपी देहात लखनऊ, यशवीर सिंह एसपी देहात अलीगढ़, गणेश प्रसाद साहा एसपी सिटी गोरखपुर, अनुपम सिंह एसपी सिटी आगरा बनाए गए, सिद्धार्थ शंकर मीना एसपी सिटी इलाहाबाद, अभिषेक महाजन गवर्नर के परिसहाय और ख्याति गर्ग एसपी ग्रामीण बरेली बनाए गए.
प्रदेश में नौ पीसीएस अफसरों का किया गया तबादला


प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अधिकारीयों का तबादला जारी है। बुधवार की शाम नौ पीसीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया।

नोएडा मेट्रो के ओएसडी घनश्याम सिंह को नोएडा में ही अपर जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। जबकि एडीएम नोएडा केशव कुमार को ओएसडी नोएडा मेट्रो के पद पर तैनाती दी गई है। प्रबंधन एवं प्रशासन अकादमी के अपर निदेशक शुभ्रांत कुमार शुक्ला को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष सचिव नियुक्त किया गया है।

कानपुर के नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह को कृषि निदेशालय का अपर निदेशक बनाया गया है। अपर निदेशक मंडी रणविजय सिंह को महिला कल्याण विभाग का विशेष सचिव नियुक्त किया गया है।

निर्वाचन विभाग के संयुक्त सचिव जितेंद्र प्रताप सिंह को मंडी परिषद का अपर निदेशक प्रशासन बनाया गया है। ग्राम्य विकास विभाग के विशेष सचिव बृजराज सिंह यादव को विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त नियुक्त किया गया है। जबकि उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण के उपाण्ध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय को आवास विकास परिषद का सचिव नियुक्त किया गया है।
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Tuesday, April 25, 2017

गैंगरेप केस: पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति सहित तीन को मिली जमानत

फाइल फोटो गायत्री प्रजापति 
गैंगरेप मामले में पिछले महीने ही जेल भेजे गए पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को लखनऊ की जिला अदालत से जमानत मिल गई है.  उनके दो साथी प‌िंटू और व‌िकास को भी एक-एक लाख रुपए पर बेल म‌िली है। गायत्री को बीते 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था।

गिरफ्तारी के दौरान गायत्री ने कहा था, मैं निर्दोष हूं। नार्को टेस्ट होगा तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।  यूपी सरकार में गायत्री के पास कई बड़े मंत्रालय रह च़ुके हैं। उसे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गायत्री प्रजापति समेत 5 लोगों के खिलाफ बीते 18 फरवरी 2017 को लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

गायत्री समेत अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 511, 376 डी पॉक्सो एक्ट 3/4 में मामला दर्ज हुआ था। प्रजापति समाजवादी पार्टी के टिकट पर अमेठी से विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था,लेकिन हार गए।
फाइल फोटो गायत्री प्रजापति 

बता दें क‌ि एक महिला ने गायत्री प्रजापत‌ि और उसके साथ‌ियों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। पीड़ित महिला के मुताबिक तीन साल उसकी गायत्री प्रजापत‌ि से मुलाकात हुई थी।
तभी मंत्री ने चाय में नशे की दवा मिलाकर उसे बेहोश कर दिया था। महिला ने आरोप लगाया क‌ि नशे की हालत में उसके साथ रेप किया गया और उसकी वीडियो क्लिप भी बनाई गई। मह‌िला ने गायत्री और उसके साथ‌ियों पर अपनी नाबाल‌िग बेटी के भी शोषण का आरोप लगाया था।

विस्तृत में...

गायत्री के साथ ही दो अन्य आरोपी विकास वर्मा और पिंटू सिंह को भी जमानत दे दी गई है. लखनऊ जिला न्यायालय के स्पेशल जज ओपी मिश्रा ने ये फैसला सुनाया है. गायत्री के खिलाफ लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है.

उधर एक दिन पहले ही सोमवार को इसी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में पूर्व मंत्री समेत बाकी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच चल रही है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को मामले की सुनवाई बंद कर देनी चाहिए. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से कहा है कि स्टेटस रिपोर्ट की कॉपी पीड़िता को भी दी जाए.
फाइल फोटो गायत्री प्रजापति 

पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मामले में उसको सुरक्षा दी जाए क्योंकि उसकी जान को खतरा है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता से कहा कि वह अथॉरिटी को ज्ञापन दे और अथॉरिटी इस पर विचार करे.
दरअसल 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा था कि आरोपी प्रभावशाली है तो इसका मतलब यह नहीं कि पुलिस एफआईआर भी दर्ज न करे. इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए और फाइनल रिपोर्ट दाखिल की जाए.

यूपी सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस मामले की जांच में कोई अपराध सामने नहीं आया है. कोर्ट ने यूपी सरकार से दो महीने में जांच रिपोर्ट मांगी है. शिकायतकर्ता चित्रकूट की रहने वाली है.
महिला का आरोप है कि आरोपी मंत्री ने सपा में उच्च पद दिलाने के नाम पर उससे पिछले दो सालों में कई बार रेप किया और उसकी नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ भी की. महिला का आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट याचिका को खारिज कर चुका था.

पिछली 6 मार्च को गैंगरेप के आरोपी यूपी के मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गायत्री प्रसाद प्रजापति ने गिरफ्तारी पर रोक और एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की मांग की थी.  इसके बाद 14 मार्च को गायत्री प्रजापति को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया था.
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Saturday, April 22, 2017

उत्तर प्रदेश के नए DGP सुलखान सिंह की ये है बड़ी प्राथमिकताएं...

लखनऊ। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि प्रदेश में कानून का राज होगा, पुलिसवालों को काम करने की पूरी आजादी होगी। गोरक्षा के नाम पर किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा, गुंडागर्दी खत्म की जाएगी।

 डीजीपी सुलखान सिंह ने इस पद का चार्ज लेते ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी है। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था से लेकर यूपी पुलिस के हर अधिकारी व जवान का समस्याओं का निदान करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकी और संदिग्ध आतंकी हमलों का जवाब देने के लिए यूपी पुलिस को पूरी तरह से तैयार है।

डीजीपी सुलखान सिंह की प्राथमिकताएं

  • पुलिस वालों के खिलाफ शिकायत पर होगी कार्रवाई
डीजीपी सुलखान सिंह से पुलिस वालों के रिश्वत लेने पर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि अगर किसी पुलिसवालों के खिलाफ ऐसी कोई भी शिकायत आती है, तो उस पर कार्रवाई होगी।
  • निष्पक्षता पर विशेष ध्यान
डीपीजी सुलखान सिंह ने कहा कि हमारी प्राथमिकताओं में निष्पक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसी भी शिकायत पर निष्पक्ष जांच होगी।
  • कानून का खौफ
डीजीपी सुलखान सिंह से पूछा गया कि क्या प्रदेश में अब अपराधियों में पुलिस का खौफ होगा। उन्होंने जवाब में कहा कि 'खौफ पुलिस का नहीं कानून का बनाया जाएगा'।
  • शत-प्रतिशत दर्ज होंगे केस
डीजीपी ने कहा कि थानों में आने वाली शिकायतें शत-प्रतिशत दर्ज की जाएंगी। किसी को भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
  • एंटी रोमियो स्क्वॉड
डीजीपी ने कहा कि एंटी रोमियो स्क्वॉड के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। इसे फिलहाल बंद करने की कोई योजना नहीं है। इस स्क्वॉड को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा। वहीं बेवज़ह किसी को परेशान नहीं किया जाएगा।
  • पुलिस पर नहीं चलेगा कोई दबाव
डीजीपी सुलखान सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि यूपी पुलिस पर राजनीतिक या अन्य किसी तरह का दबाव नहीं चलेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोगों की समस्या जरुर सुनी जाएगी।
  • अधिकारियों पर पूरा भरोसा
डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि उन्हें यूपी पुलिस के सभी अधिकारियों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी ट्रेंड है। ऐसे में मुझे पूरी उम्मीद है कि वह अच्छा काम करेंगे।
  • काम करने की पूरी आजादी
डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि अधिकारियों को काम करने के लिए पूरी आजादी मिलेगी। उन पर बेवज़ह का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
  • पुलिसवालों की सेहत का ख्याल
डीजीपी ने एक सवाल पर कहा कि यूपी पुलिस के सभी अधिकारियों व जवानों को वीक ऑफ व छुट्टी देने की व्यवस्था भी ठीक की जाएगी। बता दें कि फिलहाल यूपी पुलिस में छुट्टी व्यवस्था ठीक न होने से पुलिसवालों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
  • योग्यता के आधार पर होगी तैनाती
डीजीपी ने कहा कि केवल योग्यता को ध्यान में रखते हुए तैनाती की जाएगी। ताकि किसी भी अधिकारी व पुलिकर्मी का मनोबल काम न हो। वहीं गलत काम करने वाले पुलिसवालों पर कार्रवाई होना तय है।
  • आतंकवाद से जुड़ी चुनौती
डीजीपी सुलखान सिंह ने शनिवार को पदभार संभालते ही कहा कि यूपी पुलिस आतंकवाद से जुड़ी हर चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि हमारी इंटेलिजेंस टीमें आतंकी नेटवर्क को खत्म करने में जुटी हुई हैं। साथ ही इस पर हालिया घटनाओं को देखते हुए और भी कड़ाई से काम किया जाएगा। हमारी इंटेलिजेंस टीम इस पर नज़र रख रही है।
  • डीजीपी पद खुद में बड़ी जिम्मेदारी
डीजीपी सुलखान सिंह ने पदभार संभालते ही कहा कि यूपी पुलिस का यह पद अपने आप में ही एक बड़ी चुनौती है। वह इससे जुड़ी हर जिम्मेदारी को पूरा करेंगे।
  • पीड़ित की समस्या सुनेंगी पुलिस
डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि पुलिस अधिकारी भी पीड़ितों की समस्याएं सुनेंगे। उन्होंने बताया कि सभी अधिकारी एक निश्चित समय पर अपने ऑफिस में पीड़ितों की समस्याएं सुनेगें। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उचित कदम उठाएंगे।

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UP के नए DGP सुलखान सिंह ने ग्रहण किया कार्यभार, बाेले UP में नहीं चलेगी गुंडागर्दी

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में कमान संभालते ही नए डीजीपी सुलखान सिंह ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं. पहली प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके कार्यकाल में किसी भी तरह की गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे अपराध करने वाला सत्ताधारी दल से ही क्यों न जुड़ा हो. उन्होंने बताया कि इस म संबंध सीएम योगी की तरफ से भी उन्हें निर्देश मिले हैं.

गोरक्षा के नाम पर नहीं चलेगी गुंडागर्दी
नए डीजीपी ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर किसी को गुंडा गर्दी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अगर कोई कानून हाथ में लेता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी.

रोमियो को पकड़ने सादे कपड़ों में घूमेगी पुलिस
वहीं एंटी रोमियो पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि अब पुलिस रोमियो की पहचान करने सादे कपड़ों में घूमेगी. वहीं इस अभियान में किसी बेगुनाह को परेशान नहीं किया जाएगा.

साफ-स्वच्छ छवि के सुलखान सिंह बांदा के रहने वाले हैं. सिंह यूपी कैडर के 1980 के अधिकारी हैं. डीजीरी बनने से पहले वो डीजी ट्रेनिंग के पद पर तैनात थे.सुलखान सिंह आईआईटी रूड़की के एल्यूमिनाई भी हैं.

उत्तर प्रदेश के नए डीजीपी सुलखान सिंह ने शनिवार सुबह पुलिस महानिदेशक कार्यालय जाकर अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान उनके साथ पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने पुष्पगुच्छ देकर उन्हें सम्मानित किया वहां पर तमाम पुलिस के आलाधिकारी मौजूद रहे। पदभार ग्रहण करने के बाद डीजीपी मीडिया से रूबरू हुए इस दौरान उन्होंने प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर करने का वादा किया।

पढ़े: IPS सुलखान को योगी राज में 'न्याय', क्यों हटाए गए डीजीपी जावीद अहमद


प्रदेश की जनता की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

नए डीजीपी सुलखान सिंह ने प्रदेश की जनता से यह वादा किया है कि उनकी सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा वह काफी समय तक फील्ड में मौजूद रहे हैं उन्हें मालूम है कि कानून-व्यवस्था के लिए किस तरह काम करना है। उन्होंने कहा कि जो सरकार की मंशा है हम उसपर खरा उतरेंगे।


ड्यूटी से पहले पुलिसकर्मियों को ब्रीफिंग
डीजीपी ने कहा है कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने से पहले उन्हें ब्रीफ करने की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारियों की होगी। ड्यूटी लगाने के लिए आरआई से नीचे का अधिकारी नहीं होगा। ड्यूटी पर कौन है कौन नहीं समय से आया है या नहीं इसका भी सही ढंग से मिलान किया जायेगा।

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पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने गुलदस्ता देकर नवनियुक्त मुखिया का किया स्वागत...

आईजी, डीआईजी सभी जनता से मिलेंगे
नए डीजीपी ने कहा कि प्रदेश के सभी आईजी, डीआईजी, एसएसपी कार्यालय में जनता से एक तय समय में मुलाकात करके उनकी बात सुनेंगे। उन्होंने कहा कि वह खुद पीड़ित जनता से मिलेंगे। अधिकारियों से सीधी मुलाकात होने से लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा, इससे कानून-व्यवस्था बेहतर होगी।


थानों 100 प्रतिशत दर्ज होगी एफआईआर
डीजीपी ने प्रदेश के लोगों से यह वादा किया अब थानों में सौ प्रतिशत एफआईआर दर्ज की जायेगी। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने से सही केस और सही आरोपी की पहचान हो सकेगी। साथ ही केस के बारे में भी सही जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि एफआईआर ना दर्ज करने वाले लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।


प्रदेश की कानून-व्यवस्था होगी बेहतर
डीजीपी ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था बेहतर होगी। इसका कारण यह है यूपी पुलिस में भारी मात्रा में नई भर्तियां हो रही हैं। पुलिस को मजबूत करने के लिए कई और भी चीजें की जाएंगी। साथ ही जो जनता का पुलिस के प्रति रवैया है उसे बेहतर करेंगे ताकि पुलिस के प्रति लोगों में व्याप्त भय दूर हो सके और पुलिस मजबूत हो सके।


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Friday, April 21, 2017

कौन हैं सुलखान सिंह ?, कितनी है संपत्ति ?, योगी ने खोजा योगी DGP

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम 12 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए है. जिसके तहत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह को यूपी का नया डीजीपी बनाया है. वे  जावीद अहमद की जगह लेंगे.
बता दें कि 1980 कैडर के यूपी के सबसे सीन‍ियर आईपीएस अफसर सुलखान तेज-तर्रार इमेज वाले अफसरों में ग‍िने जाते हैं. सुलखान सिंह प्रदेश के सबसे सीनियर आईपीएस ऑफिसर हैं। लेकिन इनका कार्यकाल सिर्फ 4 माह ही बचा है।

वहीं जावीद अहमद को पीएसी का डीजीपी बनाया गया है, जबकि आदित्यनाथ मिश्रा को एडीजी लॉ एंड ऑर्डर नियुक्त किया गया है. योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की कानून व्यवस्था आईपीएस सुलखान सिंह को सौंपी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम 12 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए है. जिसके तहत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह को यूपी का नया डीजीपी बनाया है. वे  जावीद अहमद की जगह लेंगे.

कौन हैं सुलखान सिंह ?
साल 1980 कैडर के यूपी के सबसे सीन‍ियर आईपीएस सुलखान तेज-तर्रार छवि वाले अधिकारियों में ग‍िने जाते हैं. बता दें क‍ि स‍ितंबर महीने में ही सुलखान का र‍िटायरमेंट है. अभी तक सुलखान सिंह डीजी ट्रेन‍िंग के पद पर तैनात थे.

सुलखान  बांदा के रहने वाले हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग के साथ लॉ की डिग्री भी ली है. बताया जा रहा है क‍ि सीन‍ियॉर‍िटी के आधार पर उन्हें यूपी का डीजीपी बनाया गया है


सुलखान सिंह आगरा की सांसों में बसते हैं। चौंकिए मत। वे आगरा में 1987 के अंत में एसपी सिटी बनकर आए थे। दो जोड़ी कपड़ों में चलने वाले सुलखान सिंह बहुत ही साधारण तरीके से रहते थे, लेकिन खासियत यह थी, उनके चार्ज लेने के बाद आगरा का माहौल ही बदल गया।

5 महीने बाद रिटायर हो जाएंगे सुलखान

मूल रूप से बुंदेलखंड के बांदा के रहने वाले सुलखान सिंह पांच महीने बाद रिटायर हो जाएंगे। सुलखान को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है। राजनाथ सिंह सरकार में वे लखनऊ के डीआईजी थे। यह महज इत्तेफाक ही है कि वह जब प्रदेश के डीजीपी बने तो राजनाथ सिंह भी लखनऊ में थे। सुलखान रामपुर, पीलीभीत, सहारनपुर, इलाहाबाद और आगरा में पुलिस कप्तान रह चुके हैं। वे मिर्जापुर, इलाहाबाद और लखनऊ के डीआईजी रह चुके हैं।

योगी ने खोजा योगी DGP, 36 साल की नौकरी में सिर्फ तीन कमरों का घर बना पाए सुलखान


रहने के लिए सिर्फ तीन कमरे का एक फ्लैट। लखनऊ के अलकनंदा अपार्टमेंट में। गृह जनपद बांदा में महज ढाई एकड़ जमीन। यबतौर आइपीएस 36 साल की नौकरी में इतनी संपत्ति जुटा पाए हैं यूपी पुलिस के नए सुलतान बने सुलखान सिंह। आईएएस-आईपीएस की बात छोड़िए, आज जब बाबुओं के भी करोड़ों के जायदाद खड़ी कर लेने की खबरें आती हैं, तब सुलखान सिंह जैसे अफसर मिसाल पेश करते हैं। सुलखान यूपी के उन बिरले आईपीएस हैं, जिन्होंने नेताओं के पैर छूकर पोस्टिंग के जमाने में भी अपनी रीढ़ की हड्डी सही-सलामत रखी है। कल्याण सिंह के जमाने में अगर पुलिस का इकबाल बुलंद हो सका था, वह उसलिए कि डीजीपी की कुर्सी प्रकाश सिंह जैसे तेजतर्रार और ईमानदार अफसर के हाथ में थी। जो जिलों और थानों की नीलामी नहीं लगाते थे। आज सुलखान सिंह के हाथ में यूपी पुलिस की कमान है। उम्मीद है कि अब थाने नहीं बिकेंगे। जैसा कि सपा सरकार में खबरें आती थीं। दारोगाओं को योग्यता नहीं बल्कि माल कमाकर देने की योग्यता से थाने मिलते थे।


सुलखान सिंह की ईमानदारी ही अब तक उनकी करियर की राह में रोड़ा बनी रही। अगर 2007 के बसपा राज में सुलखान सिंह मुलायम के समय यूपी पुलिस भर्ती घोटाले की पोल न खोलते तो अब तक कब के डीजीपी बन चुके होते। भला सोचिए, यूपी के  आइपीएस अफसरों की सीनियारिटी लिस्ट में नंबर 1 पर नाम है। मगर अखिलेश यादव के राज में उनसे आठ सीढ़ी नीचे बैठे जावीद अहमद को डीजीपी की कुर्सी मिल गई। जावीद अहमद भी काबिल अफसर माने जाते रहे हैं मगर ऊपर के सात अफसरों को नजरअंदाज कर डीजीपी पद पर बैठाना सरकार की विशेष रुचि की तरफ इशारा करता है। जब 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो भर्ती घोटाले की जांच करने की कीमत चुकानी पड़ी। आम तौर पर उन्नाव के जिस पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में डीआइजी स्तर के अफसर की तैनाती होती थी, वहां सुलखान सिंह को तब भेजा गया, जब वह एडीजी रैंक के अफसर थे। यहां काम करते हुए 10 अप्रैल 2015 को प्रमोशन पाकर डीजी मिले। जिसके बाद डीजी ट्रेनिंग की कुर्सी मिली। भले ही अफसर इस पद को अपने लिए सजा मानते हों मगर सुलखान सिंह ने ट्रेनिंग के तौर-तरीकों को सुधारने में खास भूमिका निभाई। यानी जो भी जिम्मेदारी सरकार ने दी, उससे हरसंभव  न्याय करने की कोशिश की।

आइआइटी से बीटेक हैं सुलखान

सुलखान सिंह ने आइआइटी रुड़की से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल किए। फिर एफआइआइ की। विधि स्नातक भी हुए। फिर सिविल सेवा की तैयारी की तो भारतीय पुलिस सेवा में चुने गए। वर्ष 1980 बैच के सुलखान सिंह  की नौकरी ट्रेनिंग आदि के बाद 1983 में कन्फर्म हो गई। तब से लगातार कई जिम्मेदारियां संभालते गए। 2001 में लखनऊ में डीआइजी रहने के दौरान कई भ्रष्ट पुलिस अफसरों पर ट्रांसफर का हंटर चलाकर भी सुर्खियों में रहे।

स्वीटी कांड के खुलासे से हीरो बने थे सुलखान सिंह

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार बताया गया कि वो दौर था, जब कांग्रेस की सरकार थी। उस समय कमला नगर की एक युवती का पूरे आगरा में हल्ला था। स्वीटी की जुगाड़ पुलिस प्रशासन से लेकर राजनीतिक लोगों तक थी। उसके संबंध राजधानी तक थे। सबको अपने इशारों पर नचाने वाली स्वीटी सुलखान सिंह के चंगुल में फंसी, तो निकल नहीं पाई। सुलखान सिंह ने स्वीटी की गिरफ्तारी की, वो भी बिना एसएसपी और डीआईजी को बताए। हालांकि राजनीतिक दबाव बहुत अधिक था, लेकिन निर्भीक, निडर एसपी सिटी सुलखान सिंह के आगे किसी की नहीं चली।

आगरावालों के दिल में बनाई जगह

उनके लम्बे पत्रिकारिता के कार्यकाल में सुलखान सिंह पहले ऐसे एसपी सिटी आगरा में रहे, जिन्होंने जनता के दिल में जगह बनाई। सुलखान सिंह की कार्यशैली से जनता इतनी प्रभावित थी, कि जब 1989 के अंत में उनका तबादला मेरठ हुआ, तो लोगों को दुख हुआ। लोग चाहते थे, कि वे आगरा में रुकें। पहले ऐसे अधिकारी थी, जिनकी विदाई के लिए जनता ने चौराहों पर रोक रोक कर उन्हें विदाई दी।

इन मामलों के एक्सपर्ट हैं सुलखान सिंह

सुलखान सिंह वैसे तो अपराधियों के लिए काल हैं, लेकिन उनकी खासियत ये है, कि वे पारिवारिक मामलों के एक्सपर्ट हैं। आगरा में परिवार से जुड़़े कई मामले उनके द्वारा इतनी आसानी से सुलझाए गए, कि लोग उनके कायल हो गए। कई मामलों में तो वे सामाजिक दृष्टि से निर्णय लेते हैं।
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