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Saturday, April 1, 2017

जब EVM से निकली कमल की पर्ची, सलीना सिंह बोलीं- खबर छापी तो थाने पहुंचा दूंगी


ग्वालियर। मध्य प्रदेश के भिंड में VVPAT (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) की चैंकिंग के दौरान ईवीएम का बटन दबाने पर कमल का फूल प्रिंट हुआ। अब मामले में इलेक्शन कमीशन ने रिपोर्ट बुलाई है। बता दें कि भिंड के अटेर में अगले हफ्ते बाईइलेक्शन होना है। ये सीट विधानसभा में लीडर अपोजिशन रहे सत्यदेव कटारे के निधन से खाली हुई है। वहीं, जब मीडिया ने इस पर सवाल उठाया तो चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर सलीना सिंह ने कहा- "खबर छापी तो थाने भिजवा दूंगी।" कांग्रेस समेत दूसरे राजनीतिक दलों ने मामले पर उठाए सवाल हैं।

डेमो के जिए लिए जैसे ही बटन दबाया तो कमल के फूल की पर्ची निकली। पत्रकारों ने सवाल किए तो सिंह ने हंसकर कहा, मत छापना नहीं थाने में बिठलवा दूंगी।
 9 अप्रैल को होनी है वोटिंग...
- मध्य प्रदेश की अटेर और बांधवगढ़ विधानसभा सीट के लिए 9 अप्रैल को उपचुनाव होना है। दोंनों विधानसभा चुनाव में इस बार VVPAT से वोटिंग होगी।
- इस मशीन की खासियत यह है कि इससे वह पर्ची निकलती है, जिसको आपने वोट दिया होता है। इसे आप घर नहीं ले जा सकते। ये पर्चियां इलेक्शन कमीशन कुछ महीने सुरक्षित रखता है।
- शुक्रवार को सलीना भिंड पहुंची थीं। उनके सामने ही VVPAT मशीन का डेमो हुआ।
- मशीन से जुड़ी ईवीएम पर चौथे नंबर का बटन दबाया तो वीवीपीएटी ने पर्ची निकली, जो सत्यदेव पचौरी के नाम की थी। इस पर कमल का फूल चुनाव चिह्न था।
- उन्होंने फिर से बटन दबाया तो भी कमल का फूल प्रिंट हुआ। हालांकि तीसरी बार उन्होंने नंबर एक पर बटन दबाया तो पंजा निकला।
- ये देखकर सिंह बोलीं, "अब बराबर हो गया है। अगर मीडिया में यह सब छपा तो थाने भिजवा दूंगी।"

क्या बोला इलेक्शन कमीशन?

- इलेक्शन कमीशन के स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, "डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर से हमने डिटेल रिपोर्ट मंगाई है। उम्मीद है कि ये शनिवार शाम तक मिल जाएगी।"
- वहीं, कांग्रेस नेता गोविंद सिंह ने कहा, "मीडिया को धमकाया जा रहा है। चुनाव आयोग को चाहिए कि सलीना सिंह को हटाया जाए।"
- "मशीन को लेकर जो आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, वे सीईओ सलीना सिंह के सामने ही सही साबित हो गईं। अटेर में मतपत्र से चुनाव कराए जाने चाहिए।"
- बाद में सलीना ने कहा, "चुनाव आयोग मध्यप्रदेश में पहली वार EVM के साथ वीवीपीएटी मशीन का इस्तेमाल कर रहा है। ये पूरी तरह सेफ है। मशीन से मतदाता मतदान के बाद सात सेकेंड तक दिए गए वोट को देख सकेंगे।"

क्या बोले भिंड कलेक्टर?

- इलैया राजा के मुताबिक, "चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर सलीना सिंह ने दोनों बार ही बीजेपी के सिंबल वाला बटन दबाया था। हालांकि शनिवार शाम को सभी राजनीतिक दलों के सामने फिर से वोटिंग मशीन का प्रदर्शन रखा गया है।"

क्या है EVM कॉन्ट्रोवर्सी?

- मायावती ने यूपी इलेक्शन में हार के बाद कहा कि चुनाव जनता ने नहीं, ईवीएम ने हराया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 325 सीट जीतकर भी बनावटी मुस्कराहट से साफ होता है कि चुनाव धांधली कराकर जीता है।
- उत्तराखंड में हार के बाद हरीश रावत ने कहा कि मोदी क्रांति और ईवीएम के चमत्कार को सलाम करता हूं।
- वहीं, केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में AAP का 20 से 25% वोट ईवीएम के जरिए अकालियों को ट्रांसफर हो गया। मेरा मानना है कि हम जीत रहे थे और ईवीएम में गड़बडी के असली कारण क्या थे, इसका मुझे पता नहीं है। अगर ईवीएम में गड़बड़ी की जाती है तो चुनावों का क्या मतलब। हमें पंजाब में सत्ता से बाहर रखने के लिए सारा खेल किया गया।
- EVM विवाद के बाद इलेक्शन कमीशन ने कहा कि मशीन को 2 बार चेक किया जाता है। उसे कैंडिडेट के सामने जांचा और सील किया जाता है। काउंटिंग से पहले भी ईवीएम को कैंडिडेट्स के सामने खोला जाता है।
- बता दें कि 1980 में इलेक्शन कमीशन ने राजनीतिक दलों को EVM दिखाई थी। लेकिन 24 साल बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में इसका पूरे देश में इस्तेमाल शुरू हो सका।
डेमोक्रेसी एट रिस्क बुक में सवाल उठा- क्या ईवीएम पर भरोसा कर सकते हैं?
- 2010 में बीजेपी लीडर जीवीएल नरसिम्हा राव की बुक 'डेमोक्रेसी एट रिस्क-कैन वी ट्रस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन?' आई। इस बुक की प्रस्तावना आडवाणी ने लिखी।
- आडवाणी ने लिखा था, "टेक्नोलॉजी के नजरिए से मैं जर्मनी को मोस्ट एडवांस्ड देश समझता हूं। वहां भी ईवीएम के इस्तेमाल पर बैन लगा चुका है। आज अमेरिका के 50 में से 32 स्टेट में ईवीएम पर बैन है। मुझे लगता है कि अगर हमारा इलेक्शन कमीशन भी ऐसा करता है, तो इससे लोकतंत्र मजबूत होगा।"
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Wednesday, March 22, 2017

UP: माननीयों को मिली नौकरी, CM योगी ने बांटे विभाग, जानें किसको मिला कौनसा मंत्रालय...

लखनऊ। योगी आद‍ित्यनाथ ने बुधवार को मंत्र‍ियों के बीच वि‍भागों का बंटवारा कर द‍िया। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी के प्रस्ताव दोनों उप मुख्यमंत्रियों सहित सभी 22 मंत्री, 9 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा 13 राज्यमंत्रियों को विभाग आवंटित करने पर अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

ये 22 मंत्रालय CM ने रखे अपने पास
योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री) :मुख्यमंत्री ने गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सर्तकता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, समन्वय, भाषा, वाह्य सहायतित परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप आदि विभाग अपने पास रखे हैं।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य : लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम विभाग का कार्यभार आवंटित किया गया है।

उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा : माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का कार्यभार आवंटित किया गया है।

पढ़ें किसे म‍िला कौन सा व‍िभाग?
कैबिनेट मंत्री  
(1)  सूर्य प्रताप शाही - कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान,
(2)  सुरेश खन्ना-  संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास,
(3)  स्वामी प्रसाद मौर्य - श्रम एवं सेवा योजना, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन,
(4)  सतीश महाना- औद्योगिक विकास,
(5)  राजेश अग्रवाल-  वित्त,
(6)  रीता बहुगुणा जोशी - महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण, पर्यटन,
(7)  दारा सिंह चैहान-  वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान,
(8)  धरमपाल सिंह- को सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक),
(9)  एस0पी0 सिंह बघेल - पशुधन, लघु सिंचाई, मत्स्य,
(10)  सत्यदेव पचैरी - खादी, ग्रामोद्योग, रेशम, वस्त्रोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन,
(11) रमापति शास्त्री - समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण,
(12)  जय प्रकाश सिंह- आबकारी, मद्यनिषेध,
(13)  ओम प्रकाश राजभर - पिछड़ा वर्ग कल्याण, विकलांग जन विकास,
(14)  बृृजेश पाठक - विधि एवं न्याय, अतिरिक्त उर्जा स्रोत, राजनैतिक पेंशन,
(15)  लक्ष्मी नारायण चैधरी - दुग्ध विकास, धमार्थ कार्य, संस्कृति, अल्प संख्यक कल्याण,
(16)  चेतन चौहान - खेल एवं युवा कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास,
(17)  श्रीकांत शर्मा - ऊर्जा,
(18)  राजेन्द्र प्रताप सिंह - ग्रामीण अभियंत्रण सेवा,
(19)  सिद्धार्थ नाथ सिंह - चिकित्सा एवं स्वास्थ्य,
(20)  मुकुट बिहरी वर्मा - सहकारिता,
(21)  आशुतोष टण्डन - प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा, एवं
(22)  नंद कुमार नंदी - स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन नागरिक उड्डयन विभाग आवंटित किया गया है।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  

(1)  अनुपमा जैसवाल - बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, राजस्व (एम0ओ0एस0), वित्त (एम0ओ0एस0),
(2)  सुरेश राणा - गन्ना विकास एवं चीनी मिलें, औद्योगिक विकास (एम0ओ0एस0),
(3)  उपेन्द्र तिवारी- जल सम्पूर्ति, भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास, वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान, सहकारिता (एम0ओ0एस0)
(4) डाॅ0 महेन्द्र सिंह- ग्रामीण विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एम0ओ0एस0),
(5)  स्वतंत्रदेव सिंह - परिवहन, प्रोटोकला, ऊर्जा (एम0ओ0एस0),
(6)  भूपेन्द्र सिंह चैधरी - पंचायती राज, लोक निर्माण (एम0ओ0एस0),
(7) धरम सिंह सैनी - आयुष, अभाव सहायता एवं पुनर्वास,
(8)  अनिल राजभर - सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण, होमगार्डस, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा एवं
(9) श्रीमती स्वाति सिंह - एन0आर0आई0, बाढ़ नियंत्रण कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण (एम0ओ0एस0) विभाग का कार्य आवंटित किया गया है।

 राज्यमंत्री 
(1)  गुलाबो देवी - समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण,
(2)  जय प्रकाश निषाद - पशुधन एवं मत्स्य, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि,
(3)  अर्चना पाण्डेय - खनन, आबकारी, मद्यनिषेध,
(4)  जय कुमार सिंह जैकी - कारागार, लोक सेवा प्रबंधन,
(5)  अतुल गर्ग - खाद्य-रसद, नागरिक आपूर्ति, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन,
(6)  रणवेन्द्र प्रताप सिंह - कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान,
(7)  नीलकंठ तिवारी - विधि-न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण,
(8)  मोहसिन रज़ा - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, मुस्लिम वक्फ, हज,
(9)  गिरीश यादव - नगर विकास, अभाव सहायता एवं पुनर्वास,
(10)  बलदेव ओलाख- अल्पसंख्यक कल्याण, सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक),
(11)  मन्नु कोरी - श्रम सेवा योजना,
(12)  संदीप सिंह -को बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक, चिकित्सा शिक्षा तथा
(13)  सुरेश पासी को आवास, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विभाग का कार्यभार आवंटित किया गया है।

योगी ने सरकारी दफ्तरों में गुटखा-पान पर रोक लगाने का दिया ऑर्डर


  • - इससे पहले आदित्यनाथ ने बुधवार को सेक्रेटरिएट का दौरा करने के बाद सरकारी दफ्तरों में गुटखा-पान और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऑर्डर दिया।
  • - डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा, "सीएम ने अधिकारियों को पूरे राज्य के दफ्तरों में सफाई के निर्देश दिए ताकि बदलाव साफ दिखाई पड़े। सरकारी दफ्तरों और इमारतों में गुटखा-पान और प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करने के निर्देश भी सीएम ने दिए।"
  • - बता दें कि योगी मीटिंग के बाद एनेक्सी पहुंचे थे। यहां उन्होंने अफसरों के कमरों का दौरा क‌िया, जहां काफी गंदगी द‌िखी। सीएम ने चीफ सेक्रेटरी को ये भी निर्देश दिए कि शाम 6 से 10 बजे तक डिपार्टमेंट्स का प्रेजेंटेशन होगा।

स्लॉटर हाउस बंद करने के लिए एक्शन प्लान

  • - योगी ने पुलिस अफसरों को निर्देश दिए कि वो स्लॉटर हाऊस बंद करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करें। इस बीच अलीगढ़ से 60 मवेशियों के साथ 20 लोगों को अरेस्ट किया गया। हाथरस में 3 मीट की दुकानों पर अज्ञात लोगों ने आग लगा दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
  • - सोर्सेज के मुताबिक, योगी ने गायों की तस्करी पर पूरी तरह से बैन लगाने की बात कही। सोर्सेज की मानें तो सीएम बड़े ज‌िलों में तैनात करप्ट अफसरों की फाइलें तलब करेंगे।
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Monday, March 20, 2017

योगीराज : बुन्देलखंड के पत्थर कारीगर का बेटा बना सूबे का मंत्री...

लखनऊ/ललितपुर । भाजपा नेतृत्व ने सूबे के मंत्रिमंडल में पत्थर कारीगर के बेटे को जगह देकर सबको चौका दिया है। महरौनी विधायक मनोहर लाल पंथ उर्फ मन्नू कोरी की राजनीति जिला पंचायत के इर्दगिर्द ही रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत दर्ज कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसकी बदौलत उन्हें मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया गया है।


जब ललितपुर जनपद की विधानसभा महरौनी विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी मनोहर लाल पंथ उर्फ मन्नु कोरी को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त हुआ। तो लखनऊ में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मनोहरलाल पंत उर्फ मन्नू कोरी को राज्य मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। जब उनका नाम मंत्री पद के लिए संभावित सूची में सम्मिलित किया गया तो जनपद में खुशियां मनाने का सिलसिला आरंभ हो गया और जैसे ही उनको शपथ ग्रहण के लिए बुलाया गया तो यह छोटी-छोटी खुशियां एक बड़े माहौल में बदल गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी जगहों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के अलावा लोगों ने जनपद में मंत्री रूपी उत्सव मनाया।

शपथ ग्रहण के बाद लोगों से मिलते समय एक चित्र मनोहर लाल पंथ...
 उनके पिता हरजू प्रसाद ग्राम धौर्रा में पत्थर कारीगर थे। मन्नू कोरी की शिक्षा हाईस्कूल उत्तीर्ण है। यह परीक्षा उन्होंने श्री वर्णी जैन इंटर कालेज से पास की थी। इसी दौरान वह राजनीतिक घराने बुंदेला परिवार के संपर्क में आ गए। उन्होंने बांसी सीट से जिला पंचायत सदस्य का पहला चुनाव लड़ा। इसमें उन्हें जीत हासिल हुई। इसके बाद जिला पंचायत का अगला चुनाव हार गए, लेकिन उनकी पत्नी कस्तूरी देवी थनवारा सीट से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गई। मन्नू कोरी व उनकी पत्नी ने अगले जिला पंचायत चुनाव में फिर भाग्य आजमाया। इसमें दोनों की हार हुई। वर्ष 2010 में उन्होंने अपने बेटे चंद्रशेखर पंथ को जाखलौन सीट से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया, जिसमें वह जीत गए। वर्ष 2015 में बिरधा सीट पर जिला पंचायत का चुनाव चंद्रशेखर पंथ ने लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार मिली। वर्ष 2012 में महरौनी सुरक्षित विधानसभा सीट पर भाग्य आजमाया। बसपा के फेरनलाल अहिरवार ने उन्हें करीब 1700 वोटों के अंतर से हरा दिया। वर्ष 2017 के चुनाव में उन्होंने 1,59,291 वोट प्राप्त किए, जबकि बसपा के उम्मीदवार फेरनलाल अहिवार को 59,727 मत हासिल हुए। इस तरह उन्होंने करीब 99 वें हजार वोट से जीत हासिल की। इस तरह उनका नाम बड़ी जीत दर्ज करने वाले विधायकों में शुमार हो गया। इसका प्रतिफल मंत्री के रूप में मिला है।    
जनपद ललितपुर बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जिला है और इस जिले में कई विकास कार्य होना बाकी है। इसलिए जब मैं महरौनी विधानसभा से विजय प्रत्याशी को मंत्री पद के लिए बुलाया गया तभी से यहां के लोगों को बड़ी ही आस और उम्मीद बनी है। लोगों को अब लग रहा है कि जब हमारे जनपद से एक मंत्री बनाया गया तो हमारे जनपद का विकास सुनिश्चित है, हालांकि इसके पहले भी यहाँ से मंत्री रहे है। इसके पहले बीजेपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डां अरविन्द जैन यहीं से रहे हैं और अब नये मंत्री का काम है कि उन्हें अपने एजेंडे के हिसाब से काम करना है। लोगों से जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करना है।
इस मौके पर मंत्री के बेटे नरेश कोरी ने अपने समर्थकों के साथ नगर में एक विशाल जुलूस निकालकर लोगों को धन्यवाद दिया और उनका अभिनंदन किया।

उमा की करीबियों को मिला फायदा- महरौनी विधायक मन्नू कोरी को क्षेत्रीय सांसद/केंद्रीय मंत्री उमा भारती के करीबी रहने का फायदा मिला है। उन्हें योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में स्थान पाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। बुंदेलखंड में मन्नू कोरी व स्वतंत्र देव सिंह भी मंत्री बने हैं। इसमें मन्नू कोरी के लिए क्षेत्रीय सांसद उमा भारती का आशीर्वाद काम आया है।      

बुन्देलखंडियों की उम्मीदें      

पुतलीघाट के पुल का पुनर्निर्माण, खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत, रोजगार, उद्योग धंधे, पर्यटन विकास, प्राचीन मंदिरों का विकास, जिला अस्पताल की अपग्रेडिंग, नलकूप कनेक्शनों पर किसानों को छूट, बांधों का मुआवजा, अतिवृष्टि का मुआवजा, अन्ना प्रथा पर अंकुश आदि शामिल हैं।
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देश के दूसरे भगवाधारी सीएम योगी ने संभाली यूपी सरकार की कमान, 46 मंत्रियों ने ली शपथ, कौन है वो मंत्री जानें विस्तृत में...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नई कैबिनेट ने शपथ ले ली है। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट व राज्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लखनऊ के पूर्व मेयर दिनेश शर्मा और BJP के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथग्रहण समारोह लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों सहित NDA के कई अन्य मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। परंपरा निभाते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी नई सरकार के शपथग्रहण समारोह में शिरकत की। मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री को शामिल कर कुल 17 OBC, 6 अनुसूचित जाति (SC), 7 ठाकुर, 8 ब्राह्मण, 8 कायस्थ-वैश्य, 2 जाट और 1 मुस्लिम की UP मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी है। शपथ के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा- मुझे भरोसा है कि योगी आदित्यनाथ की टीम यूपी को उत्तम प्रदेश बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।



मुख्यमंत्री- योगी आदित्यनाथ
उपमुख्यमंत्री- केशव प्रसाद मौर्य
उपमुख्यमंत्री- दिनेश शर्मा

कैबिनेट मंत्री 

1.सूर्य प्रताप शाही
-भूमिहार जाति हैं
-बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं

2. सुरेश खन्ना
-आठ बार के विधायक है
-सीएम की रेस में रह चुके हैं

3. स्वामी प्रसाद मौर्य
-बीएसपी से बीजेपी में आए
-बीएसपी में नंबर दो की हैसियत थी
-कुशीनगर के पडरौना से चुनाव जीते हैं

4. सतीश महाना
कानपुर से सात बार विधायक रह चुके हैं
कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री रह चुके हैं
इनका परिवार संघ से जुड़ा रहा है

5. राजेश अग्रवाल
पेशे से कारोबारी हैं
अमित शाह, योगी आदित्यनाथ के करीबी हैं

6. रीता बहुगुणा जोशी
-लखनऊ कैंट से विधायक
-कांग्रेस से बीजेपी में आईं हैं, कांग्रेस की कद्दावार नेता रही हैं
-हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं

7. दारा सिंह चौहान
-बीएसपी के बीजेपी में आए है
-पूर्व सांसद रह चुके हैं

8. श्री धर्मपाल सिंह
-राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं
-पार्टी में साफ सुथरी छवि माने जाते हैं
-पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता हैं, लोध जाति के बड़े नेता हैं

9. एसपी सिंह बघेल
-राज्यसभा और लोकसभा का सदस्य रह चुके हैं
-सपा और बसपा में रह चुके हैं
-सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं

10. सत्यदेव पचौरी
-कानपुर की गोविंदनगर सीट से विधायक
-तीसरी बार विधायक बने
-ब्राह्मण जाति से संबंध हैं

11. रामापति शास्त्री
-यूपी में पूर्व मंत्री रह चुके हैं
-दलित नेता हैं

12. जय प्रताप सिंह
-सिद्धार्थनगर के बांसी सीट से विधायक हैं
-राजपरिवार से आते हैं
-ठाकुर जाति से हैं

13. ओम प्रकाश राजभर
-बीजेपी के सहयोगी दल के नेता हैं
-सुहेलदेव राजभर पार्टी के नेता हैं
-गाजीपुर के जहूराबाद सीट से विधायक हैं

14. बृजेश पाठक
-बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए हैं
-लखनऊ सेंट्रल से विधायक चुने गए
-ब्रह्माण जाति से आते हैं

15. लक्ष्णी नारायण चौधरी
-बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए हैं

16. चेतन चौहान
-पूर्व क्रिकेटर हैं, 40 टेस्ट खेले हैं
-अमरोहा से सांसद रह चुके हैं
-अमरोहा के नौगांव विधायक बने हैं

17. श्रीकांत शर्मा
-मथुरा सीट से विधायक हैं
-अमित शाह के बेहद करीबी हैं
-बीजेपी के महत्वपूर्ण फैसलों में अहम रोल अदा करते रहे हैं
-संगठन में खासा असर है

18. राजेंद्र प्रताप सिंह
-2003 में मंत्री रह चुके हैं
-प्रतापगढ़ की पट्टी सीट से विधायक रह चुके हैं

19. सिद्धार्थनाथ सिंह
– पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के नाती हैं
-इलाहाबाद पश्चिम से विधायक चुने गए हैं
-संगठन के काम के लिए जाने जाते हैं

20. मुुकुट बिहारी वर्मा
-बहराइच की कैसरगंज सीट से विधायक

21. आशुतोष टंडन
-लालजी टंडन के बेटे हैं
-बीेजेपी का ब्राह्मण चेहरा हैं

22. नंद गोपाल कुमार नंदन
-कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं, बीएसपी में रह चुके हैं
-इलाहाबाद दक्षिण से विधायक चुने गए

राज्य मंत्री  ( स्वतंत्र प्रभार)

23. अनुपमा जायसवाल
-बीजेपी की पुरानी नेता हैं

24. सुरेश राणा
-बीजेपी के कट्टर हिंदुत्वादी छवि है
-दंगों मेें आरोपी रह चुके हैं
-मुजफ्फरनगर से हैं, थाना भवन सीट से विधायक हैं

25. उपेंद्र तिवारी
-भूमिहार नेता हैं
-दूसरी बार चुनाव जीते हैं
-बलिया की फेफना सीट से विधायक हैं
-अंबिका चौधरी को शिकस्त दी

26. डॉक्टर महेंद्र सिंह
-ओडिशा में बीजेपी जीत में बड़ा योगदान
-विधान परिषद के सदस्ये हैं
-असम की प्रभारी रह चुके हैं

27. स्वतंत्र देव सिंह
-अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं
-आरएसएस से पुराना रिश्ता रहा है
-बुंदेलखंड से आते हैं

28. भूपेंद्र सिंह चौधरी
-एमएलसी से हैं
-पुराने नेता हैं
-जाटों के बड़े नेता हैं
-मुरादाबाद जिले के हैं

29. धर्म सिंह सैनी
-सहारनपुर की नुकर सीट से विधायक हैं
-इमरान मसूद को हराया है
-आयुर्वेद के डॉक्टर है

30. अनिल राजभर
-बीेजेपी के राजभर के नेता हैं
-पहले बीएसपी में रह चुके हैं

31. स्वाति सिंह
-पहली बार की विधायक हैं
-दया शंकर सिंह की पत्नी हैं
-राजपूत नेता हैं
-किस्मत की रानी कही जाती हैं, पति के अपशब्द कहने के बाद लाइमलाइट में आई

राज्य मंत्री

32. गुलाबो देवी
-दलित समाज आती हैं
-कल्याण सिंह सरकार में मंत्री रह चुकी हैं
-चंदौसी सीट से विधायक हैं

33. जयप्रकाश निषाद
-पिछड़ी जाति से हैं
-देवरिया के रुद्रपुर से विधायक हैं

34. अर्चना पांडे
-डिंपल यादव के संसदीय सीट से विधायक बनी
– कन्नौज से आती हैं
-सपा के गढ़ में जीतीं

35. जयकुमार सिंह जैकी
-जहानाबाद विधानसभा सीट से विधायक हैं
-अपना दल कोटे से मंत्री
-कुर्मी नेता हैं

36. अतुल गर्ग
-गाज़ियाबाद शहर सीट से विधायक
-बनिया समुदाय से आते हैं

37. रणवेंद्र प्रताप सिंह (धुन्नी भैया)
-राजपूत समाज से आते हैं
-फतेहरपुर के हुसैनगंज से विधायक हैं

38. नीलकंठ तिवारी
-वाराणसी दक्षिण सीट से विधायक बने, श्यामदेव राय चौधरी (दादा) का टिकट काटकर इन्हें टिकट दिया गया
-पहली बार के विधायक हैं

39. मोहसिन रजा
-योगी मंत्रिमंडल का मुस्लिम चेहरा
-पूर्व रणजी खिलाड़ी हैं
-पूर्व क्रिकेटर हैं
-किसी सदन के सदस्य नहीं हैं

40. गिरीश यादव
-कांग्रेस नेता नदीम जावेद को हराया
-योगी मंत्रिमंडल के इकलौते मंत्री

41.  बलदेव सिंह ओलख
– मंत्रिमंडल का सिख चेहरा
-रामपुर के बिलासपुर सीट से विधायक

42. मनोहर लाल पंथ
-बुंदेलखंड से आते हैं
-मन्नू कोरी नाम से जाने जाते हैं

43.  संदीप सिंह
-पूर्व सीएम कल्याण सिंह के नाती हैं
-अतरौली सीट से विधायक हैं
-लोधी समाज से आते हैं

44. सरेशा पासी
-गैर जाटों दलित समुदाय से आते हैं
-अमेठी की जगदीशपुर सीट से विधायक हैं
-कांग्रेस के गढ़ में जीते हैं

45. संगीता बलवंत

46.ज्ञानेंद्र सिंह



देश के दूसरे भगवाधारी सीएम

- योगी यूपी के पहले और उमा भारती के बाद देश के दूसरे भगवाधारी सीएम हैं। यूपी में पहली बार दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं। ये हैं केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा।
ऐसे तय हुए दो डिप्टी सीएम
- शनिवार को बीजेपी विधायक दल की मीटिंग खत्म होने के बाद पार्टी के सेंट्रल ऑब्जर्वर वेंकैया नायडू ने कहा, "विधायक दल की मीटिंग में सुरेश खन्ना ने आदित्यनाथ के नाम का प्रस्ताव रखा। दूसरों से भी पूछा गया कि क्या कोई किसी और के नाम का प्रस्ताव रखना चाहता है।"
- योगी ने कहा कि यूपी बड़ा प्रदेश है, इसलिए मुझे दो सहयोगियों की जरूरत होगी। अमित शाह जी से बात करने के बाद पार्टी ने तय किया कि योगी जी को सहयोग देने के लिए केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा।
जीत के जश्न के नाम पर डिस्टर्बेंस बर्दाश्त नहीं होगा- योगी
- राज्यपाल से मुलाकात के बाद योगी ने सभी जिलों के SSP से कहा कि जीत के जश्न के नाम पर डिस्टर्बेंस और उत्पात किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ CM क्यों?

- पॉलिटिकल एक्सपर्ट श्रीधर अग्निहोत्री ने मिडिया से बातचीत में वो 10 कारण बताए, जिसकी वजह से योगी यूपी के सीएम बनाए गए।
1) कट्टर हिंदूवादी चेहरा हैं। बीजेपी के फायर ब्रांड नेता हैं।
2) मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए नेता हैं। राम मंदिर का मुद्दा उठाते रहे हैं।
3) 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जैसा पोलराइजेशन इस विधानसभा चुनाव में हुआ है, 2019 में भी हो सकता है।
4) इस चुनाव में वेस्ट यूपी से लेकर पूर्वांचल तक योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया। माना जा रहा है कि इससे बीजेपी को जीत में काफी फायदा हुआ।
5) बीजेपी को जो बहुमत मिला है, उसमें हिंदुत्व का एजेंडा ही कारगर रहा है।
6) आदित्यनाथ पर करप्शन का कोई आरोप नहीं है।
7) योगी की कोई लामबंदी नहीं है। उनके साथ गुटबंदी जैसी कोई चीज नहीं है।
8) पूर्वांचल में अच्छी पकड़ रखते हैं, जहां मोदी-राजनाथ-अमित शाह की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।
9) गोरखपुर से 5 बार सांसद रहे हैं। विधायिका का अनुभव है।
10) आरएसएस के करीबी माने जाते हैं। इसलिए उनके नाम पर आसानी से मुहर लगी।

इस अवसर पर कुल 11 मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की। मुलायम सिंह यादव, नितिन गडकरी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, चंद्रबाबू नायडू और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। 70,000 से भी ज्यादा लोग नई सरकार का शपथग्रहण देखने पहुंचे। कांशीराम स्मृति उपवन, जहां यह शपथग्रहण हुआ, उसके बाहर कई किलोमीटर तक गाड़ियों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में आम लोग भी इस कार्यक्रम को देखने और नेताओं की एक झलक पाने के लिए यहां पहुंचे। ना केवल लखनऊ, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी आम लोग इस अवसर के साक्षी बने।


BJP ने 14 साल बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की है। 403 सीटों की उत्तर प्रदेश विधानसभा में अकेले BJP को 312 सीटें मिली हैं। BJP गठबंधन को कुल मिलाकर 325 सीटें हासिल हुई हैं। इतना बड़े जनमत हासिल करने के बाद UP में बीजेपी की सरकार बनी है। इस ऐतिहासिक मौके की भव्यता को ध्यान में रखते हुए ना केवल BJP, बल्कि NDA और कई विपक्षी दलों के नेताओं को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और अरुणाचल के CM भी इस समारोह में शरीक होने पहुंचे।
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बुन्देलखंड के स्वतंत्र देव सिंह बने राज्यमंत्री, जानें कौन है स्वतंत्र देव सिंह ? बिना विधायक बने कैसे बने मंत्री ?

लखनऊ। योगी आदित्य नाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। दो डिप्टी सीएम के साथ ही 40 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। सीएम पद की दौड़ में शामिल रहे स्वतंत्र देव सिंह को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली।

जब राज्यपाल ने योगी के मंत्री को शपथ ग्रहण के बाद रोक लिया
इस दौरान एक वाकया ऐसा हुआ जिसे देखकर वहां लोग मुस्कुरा दिए। दरअसल जिस वक्त स्वतंत्र देव सिंह ने राज्यमंत्री की शपथ ली और उसके बाद वह योगी आदित्यनाथ की ओर उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे तो राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें रोक लिया, उन्होंने कहा कि हमसे नहीं मिलेंगे, जिसके बाद स्वतंत्रदेव सिंह वापस राज्यपाल के पास लौटे और उनसे हाथ मिलाकर उनका आशीर्वाद लिया। जिसके बाद राम नाईक ने उनसे मुस्कुराकर हाथ मिलाया। आपको बता दें कि शनिवार को योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था, विधायक दल की बैठक के बाद योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा वेंकैया नायडू ने मीडिया के सामने की, उनके साथ ही दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। योगी सरकार में 23 विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार व 15 राज्यमंत्री बनाए गए हैं।

 राजनीतिक सफर
1986- आरएसएस प्रचारक बने.
1988-89-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री.
1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी.
1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी.
1996-युवा मोर्चा का महामन्त्री.
1998- फिर से भाजपा युवा मोर्चा का महामंत्री.
2001- भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष.
2004- विधान परिषद के सदस्य.
2004 प्रदेश महामंत्री बने.
2004 से 2014 तक दो बार प्रदेश महामंत्री.
2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बने.
2012- से अभी तक महामंत्री बने हुए.

पत्रकारिता में अाजमाया हाथ

 उत्तर प्रदेश में सीएम पद के दावेदारों में शामिल हुए बीजेपी के नेता स्वतंत्र देव सिंह कभी पत्रकारिता भी किया करते थे। छात्र राजनीति के बीच वह 1989-90 में स्वतंत्र भारत नामक अख़बार से जुड़े। बुंदेलखंड के छोटे से जिले उरई में वह इस अखबार के संवाददाता के तौर पर काम करते थे, लेकिन पत्रकार के तौर पर वह सफल नहीं हुए। कॉलेज में छात्र संघ चुनाव हारे। 2012 में एमएलए इलेक्शन भी बुरी तरह से हारे।


विस्तृत में...
उतार चढ़ाव भरा र‍हा राजनीतिक सफर

  • यूपी में सीएम पद के दावेदार स्वतंत्र देव सिंह एक बार एमएलसी ज़रूर बने। उनके नाम की खूब चर्चा हुई, लेकिन बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का सीएम बना दिया। 
  •  स्वतंत्र देव सिंह का राजनैतिक इतिहास बेहद उतार चढ़ाव भरा रहा है। स्वतंत्र देव सिंह बेहद गरीबी में पले-बढ़े। छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़े, लेकिन कभी भी करिश्माई सफलता नहीं मिली। इसके बाद भी वह एबीवीपी से जुड़े रहे। 
  • स्वतंत्र देव सिंह बुंदेलखंड के उरई से आते हैं। लेकिन वह मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाले हैं। वह 1984 में अपने भाई शिवदान सिंह के साथ उरई आये थे। शिवदान सिंह पुलिस विभाग में तबादले के कारण यहां आए। स्वतंत्र देव सिंह भी अपने भाई के साथ यहां आ गए।
  • यहां से इनका राजनैतिक जीवन शुरू हुआ। 1985 में ग्रेजुएशन में दाखिले के बाद 1986 में स्वतंत्र देव सिंह ने उरई के डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ इलेक्शन लड़ा लेकिन हार गए।

       ऐसे हुई राजनीति में इंट्री

  • कॉलेज से निकलने के बाद स्वतंत्र देव सिंह उरई में ही रहते हुए 1989 में ‘स्वतंत्र भारत’ नामक अखबार में बतौर जिला संवाददाता काम करना शुरू कर दिया।
  • उन्होंने इसमें करीब तीन साल तक काम किया। कभी स्वतंत्र देव सिंह के साथ रहे उरई के सीनियर जर्नलिस्ट बताते हैं कि स्वतंत्र देव सिंह ने तब के उभरते हिंदूवादी नेता विनय कटियार का इंटरव्यू अखबार में पब्लिश करा दिया। इससे वह विनय कटियार के करीबी हो गये। 1992 में उन्होंने पूरी तरह से पत्रकारिता छोड़ दी. वह संगठन में कार्यकर्ता के रूप में उरई से झांसी आ गए।
  • अब तक स्वतंत्र देव सिंह का नाम कांग्रेस सिंह था. संघ को बहुत कन्फ्यूज़न होता था। संघ में उनका नाम स्वतंत्र देव सिंह रख दिया गया।
  • यह नाम स्वतंत्र भारत अखबार से प्रेरित था, जिसमें कांग्रेस सिंह काम किया करते थे।
  • इस तरह उन्हें स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जाना जाने लगा।
  • झांसी में एबीवीपी में शामिल हुए। उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें कानपुर भेज दिया गया
  • कानपुर में वह हनुमान मिश्रा के नेतृत्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ खड़े हो गए।
  • 2000 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। 
  • इसी दौरान उनके नेतृत्व में आगरा में हुए पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन उनका राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से अच्छा परिचय हुआ।
  • इसका इनाम ये मिला कि उन्हें युवा मोर्चा से मुख्यधारा में लाते हुए पार्टी ने यूपी का महामंत्री बना दिया गया।
  • उन्हें उरई में सहकारी समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया।
2012 में हुई जमानत जब्त
  • 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह को उरई की कालपी सीट से चुनाव लड़े। यहां उन्हें बुरी तरह हार मिली।
  • कांग्रेस की प्रत्याशी उमा कांति के सामने उनकी जमानत तक जब्त हो गयी। इसके बाद भी उन्हें बीजेपी ने एमएलसी बनाया।
  • 2014 में हुए आम चुनाव उनके लिए महत्त्वपूर्ण रहे। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में होने वाली रैलियों के आयोजन की कमान दे दी।
  • यहीं से वह पीएम मोदी व अमित शाह के और करीब आ गए। बुंदेलखंड में मजबूत पकड़ के चलते 19 में से अधिकतर सीटों पर टिकट उनकी सलाह पर ही दिए गए। बीजेपी ने यहां से सभी 19 सीटें जीती तो उनका कद और बढ़ गया।

पीएम मोदी के काफी करीबी


स्वतंत्र देव सिंह पीएम मोदी के काफी करीबी हैं. उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है.लोकसभा चुनाव से लेकर यूपी विधानसभा चुनाव तक पीएम मोदी की सभी रैलियों को सफल बनाने का जिम्मा उन्हीं के पास था और अपनी संगठन क्षमता को उन्होंने साबित भी किया है.

वह एक बार एमएलसी भी रह चुके हैं. आरएसएस स्वयंसेवक रहे स्वतंत्र देव सिंह की छवि काफी ईमानदार है. इतने सालों से राजनीति में रहे स्वतंत्र देव के पास संपत्ति के नाम पर एक ही दोपहिया वाहन है.

कुशल संगठनकर्ता के रूप में पहचान

स्वतंत्र देव सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की रैली को सफल बनाने के लिए शहरों में जाकर वहीं काम जमीन में जुड़कर काम करने लगते थे. उनके पास बूथ से लेकर मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं की जानकारी रखते हैं. 

अनुशासनप्रिय नेता


स्वतंत्र देव सिंह की बैठक में सभी कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ जाना होता है. वह किसी से भी बूथ स्तर तक की जानकारी मांग सकते हैं. उनकी कार्यशैली के हिसाब से वह पीएम मोदी को काफी जंचते हैं

सीएम के दौड़ में थे शामि‍ल

- पिछड़ा वर्ग से आने के कारण स्वतंत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश का सीएम के पद का दावेदार माना गया।
- लेकिन बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को सीएम बना दिया।
- उरई के जर्नलिस्ट केपी सिंह बताते हैं कि स्वतंत्र देव सिंह भले ही चुनाव हारते रहे लेकिन सेवा भाव व नर्म स्वभाव के कारण एबीवीपी, संघ, व बीजेपी में जगह बनाते रहे और सीएम के नाम की चर्चा तक पहुंच गए।

उरई के लोगों में निराशा

- उरई में लोग चाहते थे कि स्वतंत्र देव सिंह सीएम बनें। इसके लिए उरई के संस्कृत महाविद्यालय के अंदर बने शिव मंदिर में स्वतंत्रदेव सिंह को सीएम बनाए जाने के लिए पांच दिन से मंत्रोच्चारण चल रहा था। संस्कृत महाविद्यालय के टीचर पूनेंद्र मिश्र कहते हैं कि वह चाहते थे स्वतंत्र देव सिंह सीएम बनें। स्वतंत्र देव सिंह को आगे भी इसी तरह मेहनत जारी रखने होगी।
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Friday, March 17, 2017

त्रिवेंद्र सिंह रावत बनेंगे उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री... जानें, कौन है त्रिवेंद्र सिंह रावत?

नई दिल्ली। उत्तराखंड के सीएम का पद अब त्रिवेंद्र सिंह रावत संभालेंगे। विधायक दल की बैठक में त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीएम बनाने के फैसले पर मुहर लगी। कल यानी 18 मार्च को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे। बताया जा रहा है कि देहरादून में हुई बैठक में धर्मेन्द्र प्रधान, जेपी नड्डा और श्याम जाजू के अलावा बीजेपी के सभी 57 विधायक मौजूद थे। इस दौरान रावत को विधायक दल का नेता चुना गया।

आइये जानते हैं कौन हैं त्रिवेंद्र सिंह रावत?

  • 56 वर्षीय त्रिवेंद्र सिंह रावत डोइवाला विधानसभा सीट से चुनाव जीते हैं। 
  • रावत तीसरी बार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।
  • 1983 से 2002 के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ काम किया है और कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं।
  • बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है। 
  • त्रिवेंद्र सिंह रावत फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई के इंचार्ज हैं। 
  • रावत 2002 में डोइवाला सीट से ही चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में पहुंचे थे।
  • वह 2007-12 तक प्रदेश के कृषि मंत्री भी थे। 
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश में काम किया था। 
  • रावत 18 मार्च को देहरादून में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

 स्वयंसेवक से CM बनने तक का सफर, विस्तृत में...

त्रिवेन्द्र सिंह रावत का जन्म 20 दिस्म्बर, 1960 को उत्तराखंड के एक गांव खैरासैण में हुआ था। ये पत्रकारिता में पोस्टग्रेजुएट हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत 1979 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। वह 1983 से 2002 तक आरएसएस के प्रचारक रहे। 1985 में देहरादून महानगर के प्रचारक बने। इसके बाद वह 1993 में भारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री बने।
साल 2002 मे डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए। वहीं, साल 2007 में भी वह दूसरी बार डोईवाला से विधायक चुने गए। 2012 के विधान सभा चुनाव में डोईवाला सीट छोड़ उन्होंने रायपुर विधान सभा से चुनाव लड़ा लेकिन वहां से वह हार गए।
साल 2013 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई। 2014 लोक सभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में अमित शाह के साथ सहप्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। जिसमें उन्होंने उत्तरप्रदेश से लोकसभा में 73 प्रत्याक्षियों को जितवाया।

56 वर्षीय त्रिवेंद्र सिंह रावत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के काफी करीबी मानें जाते हैं। वह फिलहाल, झारखंड में पार्टी प्रभारी भी हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की है, जिसके बाद से ही राज्य में कौन मुख्यमंत्री बनेगा इसपर प्रश्नचिन्ह् लगा हुआ था। आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का नाम फाइनल हो गया है, वहीं कल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम फाइनल हो जाएगा।  
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Wednesday, March 1, 2017

Election 2017 : पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग जारी है...

कांग्रेस के होनहार लंदन में बेचेंगे 'नारियल का जूस', यूपी में लगाएंगे आलू की फैक्ट्री- मोदी


  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया महराजगंज में जनसभा को संबोधित
  • नारियल का पानी होता है, जूस नहीं
  • GDP पर चिदंबरम-मनमोहन को पीएम ने लपेटा, कहा- 'हार्वर्ड से अच्छे हार्ड वर्क वाले'
  • जियो राहुल जियो: मोदी
महाराजगंज : (Election 2017 ) यूपी में छठे चरण के चुनाव के लिए राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को महाराजगंज में रैली करने पहुंचे। पीएम ने कोकोनट के जूस और आलू की फैक्ट्री वाले बयान को लेकर राहुल गांधी पर तंज कसा। पीएम ने कहा कि अब कांग्रेस के पास ऐसे नए होनहार लोग हैं जो कोकोनट का जूस लंदन में बेचेंगे और यूपी में आलू की फैक्ट्री लगाएंगे।
उन्होंने पूछा कि इनसे आपको कौन बचाएगा? प्रधानमंत्री मोदी ने आलू फैक्ट्री की टिप्पणी पर राहुल गांधी का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि नारियल का जूस नहीं होता, नारियल पानी होता है, यह बात तो बच्चा भी जानता है।

पीएम ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन पर हमला बोला और कहा कि एक पार्टी ने उत्तर प्रदेश को बेहाल बनाया, दूसरे ने उत्तर प्रदेश के बेहाल बनने के बारे में बात की और बाद में दोनों ने हाथ मिला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराजगंज में कहा, ‘उत्तर प्रदेश के मतदाता राज्य में 15 से अधिक वर्षों से चल रही लूटपाट को लेकर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।’ मतदाताओं ने पहले पांच चरणों में बीजेपी की जीत सुनिश्चित कर दी है, अब बाकी दो चरणों में वो हमें तोहफे एवं बोनस के रूप में अतिरिक्त वोट देंगे।
पीएम ने कहा, ‘5 चरणों का हिसाब लग चुका है, यूपी की जनता 15 साल का बदला ले रही है। जिन्होंने यूपी को लूटा उनसे लोग चुन-चुनकर बदला लेंगे।’ पीएम ने स्वच्छ भारत अभियान का नाम लिया और कहा कि मैंने इस अभियान की शुरुआत की थी लेकिन यूपी की जनता गंदी राजनीति की सफाई कर इसे दूसरे स्तर तक लेकर जाएगी।

राहुल का पलटवार

वहीं राहुल ने यूपी के कुशीनगर में पीएम मोदी पर हमला बोला। राहुल ने कहा कि मोदीजी कहते हैं कि गंगा मां ने गुजरात से अपने बेटे को बुलाया है। क्या गंगा मां का एक ही बेटा है? किसानों के मुद्दे पर भी राहुल ने मोदी को घेरा। राहुल ने कहा कि कीटनाशक की बोतल देखकर किसान सोचना है मैं इसे पी जाऊं, आत्महत्या कर लूं, किसान की आवाज मोदीजी तक नहीं जा रही है।


सपा-कांग्रेस गठबंधन पर तंज

मोदी ने कहा कि यूपी को कभी बुआ तो कभी भतीजा और कभी भतीजे के पिता चलाते रहे। अब तक विकास नहीं हुआ, लेकिन अब विकास की बात कर रहे हैं। पहले सपा और कांग्रेस गठबंधन से इंकार कर रहे थे, लेकिन डर जब हुआ तो गठबंधन कर लिया। यह ऐसा गठबंधन है, जिसमे शामिल एक ने यूपी को बर्बाद किया तो दूसरे ने देश को बर्बाद करने में कोई कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। आजादी के 75 साल बाद भी यूपी वालों के पास रहने को घर नहीं है। उन्होंने इस सवाल को जनता से भी किया और पूछा आप ही बताइए कि रहने के लिए घर होना चाहिए या नहीं? उन्होंने कहा कि भारत सरकार यूपी को पैसा देती रही, लेकिन वह धन का इस्तेमाल नहीं कर पाई।

उन्होंने राहुल का मखौल उड़ाते हुए कहा कि कल वे (राहुल) मणिपुर गए थे। वहां उन्होंने एक बड़ी घोषणा की। मणिपुर से नारियल का जूस निकालेंगे और उसे इंग्लैण्ड बेचेगें। उन्हें यह भी पता नहीं है कि नारियल केरल में होता है। गरीब बच्चा भी जानता है कि नारियल का पानी निकलता है जूस नहीं। अब जो लोग यूपी में आलू की फैक्ट्री लगाएंगे और मणिपुर के नारियल का जूस बेचेंगे, वह देश कैसे चलाएंगे?
उन्होंने कहा कि पांच चरणों में लोगों ने उनसे अपना हिसाब चुकता कर लिया है। इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह छठां और सातवां चरण का चुनाव आपके हाथ में है। यहां भी आप बीजेपी को जिताएं।
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Friday, February 17, 2017

ELECTION-2017 : आप भी जानें... महोबा के सपा प्रत्याशी सिद्धगोपाल साहू की संपत्ति और योग्यता

ELECTION-2017 : महोबा विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी सिद्धगोपाल साहू पर एक भी मुकदमा नहीं है। वह पूरी तरह से बेदाग छवि के हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए उत्तीर्ण सिद्ध गोपाल महोबा से 2002 में सपा से विधायक रह चुके  है। इनकी चल और अचल संपत्ति 45.55 करोड दर्शाई गई है।
यह 230 ग्राम सोने और 800 ग्राम चांदी के मालिक हैं। इनके पास एक राइफल, एक रिवाल्वर भी हैं। इनकी पत्नी विनीता साहू के पास 23 एक़ड़ जमीन है। 44 लाख नगदी है। सिद्धगोपाल ने कहा कि स्वच्छ छवि बदलते परिवेश में राजनीति की जरूरत है। वह अपनी छवि के लिए जनता के बीच पसंद किए जाते हैं। यही पसंद वोट में बदलेगा।
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ELECTION-2017 : आप भी जानें... महोबा के भाजपा प्रात्याशी राकेश गोस्वामी की संपत्ति और योग्यता

एमए पास राकेश हैं करोड़पति

पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रत्याशी राकेश गोस्वामी एमए उत्तीर्ण है। इन पर भी कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। इनकी चल संपत्ति 2.27 करोड़ और  अचल संपत्ति एक करो़ड़ 27 लाख। जबकि पत्नी के नाम 1.27 करोड़ चल संपत्ति। सोने के जेवर है 150 ग्राम। इन्हें अपने ब्यौरे में किसी असलहे का जिक्र नहीं किया है। इनका कहना है कि वह पहले भी जनता की सेवा कर चुके हैं। अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों के दम पर दोबारा मौका मिलेगा।  

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Sunday, January 29, 2017

ELECTION-2017 : चुनाव से पहले अखिलेश को एक और झटका: सपा विधायक नारद राय ने थामा बीएसपी का दामन

लखनऊ: बलिया से सपा विधायक और अखिलेश सरकार के मंत्री नारद राय ने रविवार को बीएसपी का दामन थाम लिया. समाजवादी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण ऐसे कायास लगाए जा रहे थे कि नारद राय बीएसपी से जुड़ सकते है.
बता दें, कि बीएसपी के महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्र ने पूर्व सपा नेता नारद राय को बसपा की सदस्यता ग्रहण करायी. जिसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने बलिया से नारद राय को प्रत्याशी बना दिया है.
बसपा में शामिल हुए नारद राय ने  कहा कि, अखिलेश यादव ने मुझे बहुत अपमानित किया.उन्होंने आगे कहा कि, जैसा की सभी जानते हैं कि, उन्होंने मुझे दो बार अपने कैबिनेट से निकाला गया. इसी कारण हमने समाजवादी पार्टी छोड़ी है. अब  मैं अपनी बची हुई जिन्दगी बसपा के नाम करता हूँ.
 यूपी में सात चरणों में वोटिंग
उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा.
केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.
मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.
ये होंगे मुद्दे
इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है.
यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.
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ELECTION-2017 : कामयाब रहा अखिलेश-राहुल का रोड शो, हम साइकिल के दो पहिए :अखिलेश, देखें रोड शो के दृश्य...

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएम अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का साझा रोड शो किया। दोनों एक ही रथ पर सवार होकर 15 किमी का सफर तय किया। इस दौरान यह तीन विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। पूरा रोड शो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से गुजरा। रोड शो शुरू होने से पहले राहुल और अखिलेश जीपीओ पर पहुंचे। वहां दोनों ने महात्मा गांधी व अंबेडकर की प्रतिमा पर फूल चढ़ाये। रोड शो जीपीओ गांधी प्रतिमा से चौक चौराहे तक चला । gpo चौराहे से शुरू हुआ रोड शो मेफेयर चौराहा हजरतगंज, नावेल्टी चौराहा लालबाग से कैसरबाग और अमीनाबाद नजीराबाद होते हुए नक्खास से गुजरा जिसमें लोगों का भारी उत्साह देखने को मिला । इससे पहले गठबंधन के बाद आज पहली बार अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात हुई। लखनऊ में दोनों नेताओं ने एक दूसरे को गले लगाया और एक साथ मंच साझा किया। मंच पर दोनों पार्टियों के कई और दिग्गज भी मौजूद रहे। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। राहुल ने दावा किया है कि दोनों पार्टी मिलकर 300 से ज्यादा सीटें हासिल करेंगी।


राहुल की स्पीच की 10 बड़ी बातें

1. "मोदी जी कहते हैं- मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ हूं, मेक इन इंडिया करना चाहता हूं। इनमें नीयत नहीं है, सब घपले हैं। पंजाब में गए सुखबीर बादल के साथ खड़े हो गए। मोदी जी को अपना विरोधाभास नहीं दिखता है, ये फर्क है।"
2. "हम यूपी को बंटने नहीं देंगे, पीछे हटने नहीं देंगे। जहां तक सीटों जैसी छोटी-छोटी बातें हैं, उन पर (सपा से) बात हो जाएगी, समझौता हो जाएगा।"
3. "आपने संगम देखा है गंगा और यमुना एक हो जाती हैं, वैसे ही दोनों पार्टियां (सपा-कांग्रेस) एक होंगी और एकसाथ लड़ेंगी। 300 से ज्यादा सीट मिलेंगी और प्रगति की सरस्वती बहेगी।"
4. "हिंदुस्तान को बचाना है तो हर जाति के लोगों को साथ मिलकर चलना होगा। तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकते।"
5. "मायावती जी और कांशीराम जी की मैं पर्सनली रिस्पेक्ट करता हूं। मायावती जी में और बीजेपी में बहुत बड़ा फर्क है। बीजेपी क्रोध और गुस्सा फैलाती है। उनकी विचारधारा से हिंदुस्तान को खतरा है। मायावती जी की विचारधारा से हिंदुस्तान को कोई खतरा नहीं।"
6. "यूपी के डीएनए में क्रोध-गुस्सा नहीं है, यहां के डीएनए में भाईचारा है, प्रेम है।"
7. "अखिलेश और मेरी दोस्ती है, वो अलग बात है। हम यूपी के युवाओं को एक ऑप्शन देना चाहते हैं। नई तरीके की राजनीति शुरू करना चाहते हैं।"
8. "हम बीजेपी को ये दिखाएंगे कि आप इस देश के लोगों को बांट नहीं सकते, उन्हें सता नहीं सकते। हम यूपी के लोगों की भावनाएं बीजेपी को दिखाएंगे।"
9. "मोदी जी के शब्दों में ये ट्रिपल पी है। इस गठबंधन से पीस (शांति) होगी, प्रॉस्पेरिटी (खुशहाली) बढ़ेगी और यूपी प्रोग्रेस (तरक्की) की राह पर आगे बढ़ेगा।"
10. "अखिलेश के साथ मेरा पर्सनल रिलेशनशिप भी है। मैं खुशी से कह रहा हू्ं ये अब पॉलिटिकल रिलेशन में बदल गया है।"

अखिलेश की स्पीच की 5 बड़ी बातें

1. "कुछ मुद्दे (सपा-कांग्रेस के) कॉमन हैं। किसान, गरीब, युवा, रोजगार हमारे मुद्दे हैं। आने वाले समय में क्या फैसले होंगे इस पर बैठकर बात करेंगे।"
2. मायावती को अलायंस में जगह देने के सवाल पर कहा, "मायावती को गठबंधन में जगह कैसे दे देते। उनको बहुत जगह लगती है। चुनाव चिह्न ही हाथी है।"
3. "सर्दी देख ली, गर्मी देख ली, बरसात देख ली, बीजेपी का घोषणापत्र भी देख लिया। अच्छे दिन देखे किसी ने?"
4. "यूपी को ये साथ पसंद हैं और काम बोलता है नारा हो। ये दोनों नारे मिल जाएं तो सोचिए क्या होगा।"
5. "कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मैं स्वागत करता हूं। लोकसभा में हम साथ-साथ रहे। कई बार कार्यक्रमों मेें मिलने का मौका मिला।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद रोड शो

सपा-कांग्रेस की ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने रोड शो किया.

राहुल ने कहा- गंगा-यमुना के मिलन से निकलेगी प्रोग्रेस की सरस्वती

राहुल ने कहा कि दिल से आप सबका स्वागत है. उत्तर प्रदेश शब्द में पहला शब्द उत्तर है, ये जो हमारी पार्टनरशिप बनी है, अखिलेश और मेरी, समाजवादी और कांग्रेस की और यूपी की जनता की, ये एक जवाब है. इतिहास में यूपी ने जवाब दिया है. 1857 में कंपनी राज के वक्त यहां फोर्स खड़ी हुईं और जवाब दिया. विरोध, गुस्से, बांटने और कंपनी को हिंदुस्तान का धन देने की राजनीति का जवाब दे रहे हैं. गंगा और यमुना का मिलन हो रहा है, प्रोगेस की सरस्वती निकलेगी.

मोदी पर निशाना

राहुल ने कहा कि ये मोदी जी के शब्दों में तीन पी है- प्रोग्रेस, प्रॉस्पर्टी और पीस. हम क्रोध की राजनीति खत्म करना चाहते हैं.

अखिलेश बोले- मैं और राहुल साइकिल के दो पहिए

अखिलेश ने कहा कि हम कांग्रेस के साथ केंद्र में भी साथ रहे हैं. ये विकास  का गंठबंधन है, जनता का गठबंधन है. जनता चाहती है कि गठबंधन हो. कांग्रेस के साथ और तेजी से काम होगा. गठबंधन को 300 से ज्यादा सीटें मिलेगीं. लोगों का भरोसा बढ़ेगा और यूपी की जनता को साथ लेकर चलेंगे. हम और राहुल साइकिल के दो पहिए हैं. विपक्षी भाईचारे पर सवाल खड़े कर रहें हैं. आज शुरुआत है. केंद्र की सरकार ने लोगों को लाइन में खड़ा कर दिया है. तकलीफ में लोगों को लाने वाले जीत के दावे कर रहे हैं. राहुल और मैं देश को खुशहाली और तरक्की के रास्ते पर ले जाएंगे और प्रदेश को भी.

5 साल चलाएंगे सरकार: अखिलेश

'27 साल यूपी बेहाल' के नारे का क्या होगा? इस सवाल पर राहुल ने कहा कि अखिलेश का काम अच्छा है. हम मिलकर लड़ेंगे. यहां हमारी गठबंधन, युवाओं की सरकार आएगी. वहीं जब राहुल से पूछा गया कि इसमें कितनी सच्चाई है कि गठबंधन सपा से नहीं अखिलेश यादव से किया है और आपको इसका इंतजार था, इसी वजह से चुनाव आयोग में कपिल सिब्बल ने अखिलेश का पक्ष लड़ा. राहुल ने कहा कि हम युवाओं को नई तरह की राजनीति देना चाहते हैं. हमारी विचारधाराओं में समानता है. हम इसी के साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं. आरएसएस और बीजेपी क्रोध  की राजनीति फैला रहे हैं, उनका जनता नकार दे. अखिलेश ने कहा कि हम दोनों मिलकर 5 साल सरकार चलाएंगे.

2019 में राहुल को पीएम के लिए प्रोजेक्ट करेंगे?

राहुल चुप रहे. वहीं, इस सवाल के जवाब में अखिलेश बोले- आपको जल्दीबाजी नहीं होने चाहिए. अखिलेश एक तरह से सवाल टाल गए.

प्रियंका गांधी के बारे में

राहुल बोले- प्रियंका ने मेरी मदद की है, वो मुझे मदद करती हैं और करती रहेंगी. चुनाव में प्रचार के बार में प्रियंका फैसला लेंगी.

राहुल अखिलेश की सरकार को क्या रेटिंग? और अखिलेश मनमोहन की सरकार के बारे में क्या कहेंगे?
इस पर राहुल ने कुछ नहीं कहा. अखिलेश ने माइक संभालेते हुए कहा- हम आने वाले पांच साल की बात कर रहे हैं. दोनों मिलकर अच्छे चलाएंगे.

किसने की गठबंधन पर पहल? रायबरेली-अमेठी से कौन लड़ेगा?

अखिलेश- सब कुछ आज ही बता देंगे तो लिखने का मसाला कैसे बचेगा?
राहुल- ये कोई सेंट्रल इश्यू नहीं है. ये सवाल नहीं है कि रायबरेली-अमेठी पर कांग्रेस कितने सीटों पर लड़ेगी. हम यूपी को बदलने जा रहे हैं, ये गठबंधन उसके लिए है. बता दें कि रायबरेली-अमेठी में 10 विधानसभा सीटें हैं.

मायावती पर नरम

राहुल ने कहा- मैं मायावती जी की इज्जत करता हूं. कांशीराम की भी इज्जत करता हूं, उन्होंने गलतियां की पर उनकी इज्जत करता हूं. मायावती और बीजेपी में बहुत बड़ा फर्क है. बीजेपी क्रोध फैलाती है, गुस्सा फैलाती है, उनकी विचारधारा से हिंदुस्तान को खतरा है. मायावती की विचारधारा से देश को कोई खतरा नहीं है. आप इन दोनों में तुलना नहीं कीजिए.

बीजेपी नेता ने कहा- एक भ्रष्टाचारी, दूसरा गुंडाचारी
अखिलेश और राहुल के साथ आने पर बीजेपी नेता ने ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद हो सकता है. मीडिया से बातचीत के दौरान बीजेपी नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा- क्या यूपी को ये गठबंध नपसंद आएगा? एक इसमें भ्रष्टाचारी है तो दूसरा गुंडाचारी.

'हमारी नीयत साफ है'
राहुल ने कहा कि अखिलेश की सोच सही रही. हम उस सोच को बल देना चाहते हैं. अखिलेश की नीयत साफ है. राजनीति साफ नीयत से होती है. मेरी नीयत अच्छी है. मोदीजी की नीयत खराब है. वो भ्रष्टाचार की बात करते हैं और पंजाब में सुखबीर सिंह बादल के लिए वोट मांगते हैं.

गठबंधन का नारा- यूपी को ये साथ पसंद है...

राहुल और अखिलेश यादव पहली बार एक साथ दिखाई दिए हैं. राहुल और अखिलेश साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद रोड शो भी करेंगे. इस गठबंधन के लिए नारा दिया गया है...'यूपी को ये साथ पसंद है, साइकिल और ये हाथ पसंद है, तरक्की की ये बात पसंद है.'

पंजाब छोड़कर यूपी आए हैं राहुल

इस नारे के साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में उतर चुकी है. गौरतलब है कि राहुल गांधी ने पंजाब के अपने दौरे को छोड़कर यूपी का रुख किया है. राहुल को 29 जनवरी को पंजाब के लांबी में एक चुनावी रैली को संबोधित करना था, लेकिन अब वह लखनऊ कूच कर गए हैं. लांबी की रैली अब 2 फरवरी को होगी.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस यूपी के चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरना चाहती है और कहीं ना कहीं 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2017 विधानसभा चुनाव को एक सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है.
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Saturday, January 28, 2017

Election 2017 : घर बैठे फ्री में बनवाएं वोटर आईडी कार्ड, ये है तरीका

नई दिल्ली। भारत में 18 साल से ऊपर की उम्र वाले नागरिक वोटर डालने के लिए वैध हैं और वो कभी घर बैठे बिना किसी चार्ज के अपना वोटर आईडी कार्ड बनवा सकते हैं। पहले जहां ब्लैक एंड व्हाइट वोटर आईडी कार्ड बनता था वहीं, अब कलर वोटर आईडी कार्ड भी बनाए जा रे हैं। ऐसे में आप घर बैठे स्मार्टफोन या कंप्यूटर की मदद से घर बैठे ही कलर वोटर आईडी कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए आपको ऑनलाइन एप्लाई करना होगा। इसके लिए आपके पास सिर्फ पर्सनल ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर होने चाहिए। इसके बाद चुनाव की आयोग की वेबसाइट
http://eci-citizenservices.nic.in
 पर जाना है फिर निम्न स्टेप्स फोलो करने हैं।
कलर वोटर आईडी के लिए ऐसे भरें ऑनलाइन फॉर्म
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर आपको न्यू रजिस्ट्रेशन के ऑप्शन पर क्लिक करना है। फिर एक पेज ओपन होगा जिसमें आपको चाही गई जानकारियां भरनी हैं। इसके बाद आपको यहां पर अपना सफेद बैकग्राउंड वाला पासपोर्ट साइज का कलर फोटो भी डाउनलोड करना है।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
घर बैठे मोबाइल फोन या लैपटॉप की मदद से वोटर आईडी कार्ड बनवाने के लिए आपको पता और आईडी प्रूफ में अलग-अलग दस्तावेजों की कॉपी अपलोड करनी है। इसके लिए आप 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, फोन/बिजली/पानी/गैस कनेक्शन बिल, बर्थ सर्टिफिकेट, ड्राइविंग तथा इनकम टैक्स 16 फॉर्म आदि में से किन्ही दो दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड कर सकते हैं।
1 महीने में बनकर आ जाएगा कलर वोटर आईडी कार्ड
कलर वोटर आईडी कार्ड के लिए एकबार ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद उसमें संलग्न किए गए दस्तावेजों की जांच करने के लिए आपके एरिया का बूथ लेवल ऑफिसर आपके घर पर आएगा। वो आपके इन दस्तावेजों की कॉपी को वेरिफाई करने के लिए ले जाएगा। इसके बाद 1 महीने के अन्दर आपको कलर वोटर आईडी कार्ड आपके घर पोस्ट द्वारा पहुंच जाएगा।
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Thursday, January 26, 2017

मुख्‍तार अंसारी बेटे, भाई सहित BSP में शामिल, तीनों को मिला टिकट...


लखनऊ. मुख्‍तार अंसारी, उनके बेटे और भाई गुरुवार को बीएसपी में शामिल हो गए। मुख्‍तार को मऊ सदर से, बेटे अब्‍बास को घोसी और भाई सिग्‍बातुल्‍लाह अंसारी को मोहम्‍मदाबाद सीट से टिकट दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज सभाजीत यादव भी बसपा में शामिल हो गए हैं। ये एलान करते हुए मायावती ने कहा- मुख्‍तार की विरोधियों ने इमेज खराब करने की कोशिश की।

- मायावती ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा, 'बसपा सरकार ने सबका विकास किया है। अपराध नियंत्रण को हमने अभियान बनाया था। मुख्‍तार की विरोधियों ने इमेज खराब करने की कोशिश की। उन्होंने भी बसपा छोड़ी थी, लेकिन अब पश्‍चाताप कर लिया है।'
- 'मुख्तार के परिवार को कृष्णानंद राय के मर्डर के आरोप में जबरदस्‍ती फंसाया गया, कोर्ट में अभी तक उनके खिलाफ कोई भी ठोस सबूत नहीं पेश किया गया। हत्या का आरोप होने से व्यक्ति आरोपी नहीं हो सकता।'
- 'आपराधिक लोगों ने मेरी सरकार के आगे घुटने टेके थे, लेकिन पूर्वांचल के कुछ लोग आज विधायक, सांसद बनने के बाद फिर से आतंक फैला रहे हैं।'
- 'अगर हमारी सरकार के दौरान किसी भी नेता-मंत्री ने गलत काम किया तो मैंने खुद ही उन्हें जेल भिजवाया।'

बीजेपी पर चुनाव आयोग करे कार्रवाई

- मायावती ने आगे कहा, 'बीजेपी राम मंदिर निर्माण का मुद्दा फिर से उठा रही है, जबकि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। मेरी पार्टी चुनाव आयोग से मांग करती है कि बीजेपी पर कार्रवाई करे।'
- 'यूपी में हो रहे विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए धर्म का सहारा लेना पड़ रहा है।'

अफजाल अंसारी ने क्‍या कहा?

- मुख्तार फिलहाल, आगरा जेल में हैं। उनके भाई अफजाल मायावती के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा, 'सपा ने हमें धोखा दिया है। मुलायम सिंह खुद कहते हैं कि अखिलेश यादव मानसिक तौर पर मुस्लिम विरोधी है। पूरे परिवार ने हमें कई बार सपा में शामिल कराया, लेकिन अखिलेश विरोध करते रहे।'
- 'मैं कौमी एकता दल का बसपा में विलय करता हूं। अगर बहन जी ड्यूटी लगाएंगी तो चौकीदार बनकर बसपा को जिताऊंगा।'

रिटायर्ड जज ने क्‍या कहा?

- जौनपुर के रहने वाले रिटायर्ड जज सभाजीत यादव ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर मायावती ने बीजेपी को बैकफुट पर किया है।
- इसीलिए उन्‍होंने मायावती को जिताने के लिए सोचा और आज वे साथ हैं।
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Sunday, January 22, 2017

यूपी चुनाव 2017 : यूपी भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, देखें पूरी लिस्ट


नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश भाजपा ने रविवार शाम को उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। इसमें 155 लोगों के नाम हैं।
इस लिस्ट में पार्टी के कई सांसदों के परिजनों को भी टिकट दिया गया है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं से अपने करीबीयों व रिश्तेदारों को टिकट की मांग न करने की सलाह दी थी।
नोएडा से राजनाथ सिहं के बेटे पंकज सिंह को टिकट दिया गया तो वहीं कांग्रेस से भाजपा में आईं वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी को लखनऊ कैंट से टिक दिया गया। भाजपा की दूसरी लिस्ट: कैराना से सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को टिकट, सांसद संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिहं को अमेठी से टिकट, मेरठ कैंट से सत्यप्रकाश अग्रवाल को टिकट मिला।
सीतापुर से राकेश राठौड़ को टिकट मिला तो सिद्धार्थ नाथ सिहं को इलाहाबाद पश्चिम से टिकट दिया गया। भाजपा ने अब तक 304 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर चुकी है।








 
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अखिलेश यादव ने जारी किया समाजवादी पार्टी का ‘घोषणा पत्र’, पढ़े पूरा घोषणा पत्र...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार 22 जनवरी को पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र को जारी किया। इस सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कार्यक्रम का संबोधन भी किया। खास बात तो से है कि अखिलेश यादव ने बिना मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव की मौजदगी में जारी किया घोषणा पत्र. अखिलेश यादव के घोषणा पत्र की मुख्य बातें ये रहीं।

समाजवादी पार्टी का घोषणा पत्र:
रविवार 22 जनवरी को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया।
इस घोषणा पत्र में अखिलेश यादव ने महिलाओं, किसानों और बच्चों को विशेष स्थान दिया है।
समाजवादी घोषणा पत्र के तहत अखिलेश यादव ने ये घोषणाएं की।
घोषणा पत्र में किसानों के लिए समाजवादी किसान कोष की व्यवस्था का वादा।
बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ओल्ड ऐज होम की व्यवस्था का वादा।
महिलाओं को रोडवेज में आधा किराया देने का वादा किया।
निर्बल आय वर्ग को मुफ्त इलाज की सुविधा का वादा।
सूबे के तीन शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट का वादा।
यह तीन शहर आगरा, कानपुर और मेरठ होंगे।
इसके साथ ही लखनऊ एयरपोर्ट पर एयर एम्बुलेंस का वादा भी घोषणा पत्र में शामिल है।
किसानों के लिए फार्मर फण्ड की सुविधा का वादा।
शहरों की ट्रैफिक समस्या को खत्म करने का वादा किया।
गाँव-गाँव में जानवरों के लिए एम्बुलेंस भेजने की सुविधा।
जनपद मुख्यालयों को 4 लेन से जोड़ने का वादा।
प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए घी और दूध पाउडर देना का वादा।
1 करोड़ लोगों को 1000 रुपये की पेंशन देने का वादा भी शामिल।
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Friday, January 20, 2017

UP Election 2017 : भाजपा पर भारी 2017, UP में अखिलेश जीतेंगे!

नई दिल्ली: देश के प्रमुख ज्योतिषाचार्य डा. अजय भांबी जिन्होंने फिल्म ‘कुली’ में अमिताभ बच्चन को लगी घातक चोट के बाद उनके फिल्म जगत में पुन: उभर कर आगे आने, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी तथा पाक की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या की भविष्यवाणियां की थीं, ने अब कहा है कि भारत की कुंडली वृष लग्न की है। 8 फरवरी तक देश को चंद्रमा में मंगल तथा उसके बाद चंद्रमा में राहू की अंतर्दशा चलेगी जिसे देखते हुए देश के लोगों में संदेह का माहौल देखा जाएगा।

वित्तीय संकट के कारण समाज में असंतोष बढ़ेगा। चंद्रमा तीसरे घर में है। चंद्रमा युवा लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। 2017 में युवा वर्ग में जागृति पैदा होगी तथा वह पुन: अन्ना हजारे जैसा कोई आंदोलन चला सकते हैं जिसकी छाया 2018 में भी पड़ेगी। इस आंदोलन के बीज 2017 में बो दिए जाएंगे। केंद्र की मोदी सरकार नौजवानों के सहयोग से सत्ता में आई थी परंतु नौजवानों के लिए वह कुछ नहीं कर सकी। अजय भांबी ने यह भविष्यवाणियां पार्लियामैंटेरियन पत्रिका में लिखे एक लेख में की हैं।

अमित शाह : अमित शाह की कुंडली का विशेषण चंद्र कुंडली के हिसाब से किया जाना बेहतर होगा। चंद्रमा नीच राशि में है तथा मंगल चौथे घर में नीच राशि में है। चंद्रमा तथा मंगल के बीच नीच भंग राजयोग बन रहा है। इसीलिए अमित शाह ने जीवन में इतनी अधिक तरक्की की। सूर्य भी सातवें घर में नीच राशि में है जिससे पता चलता है कि वह दृढ़ इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति हैं। 2017 में अमित शाह की लीडरशिप पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म लग्न वृश्चिक है तथा लग्न में नीच राशि का चंद्रमा मंगल के साथ बैठा है जिस कारण नीच भंग राजयोग बन रहा है। यही उन्हें प्रधानमंत्री की पदवी तक लेकर आया है परन्तु यही मंगल नवांश कुंडली में नीच राशि का बैठा हुआ है जिससे मंगल कमजोर हो गया है। इसीलिए मोदी ने नोटबंदी को लेकर भारी जोखिम उठाया। मोदी का राष्ट्रीय राजनीति में उभार 2009 में शुरू हुआ जब उन्हें चंद्रमा की महादशा शुरू हुई। मंगल ने अपनी ताकत चंद्रमा को दी हुई है। मंगल की कमजोरी के कारण मोदी अपने प्रोजैक्टों को पूरा नहीं कर पाते हैं। वह एक प्रोजैक्ट के बाद दूसरे प्रोजैक्ट को पकड़ लेते हैं जबकि पहला प्रोजैक्ट अधूरा ही रह जाता है। चाहे वह स्वच्छ भारत अभियान हो, मेक इन इंडिया या बुलेट ट्रेन या स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट हो। चंद्रमा में शनि की अंतर्दशा 1 दिसम्बर, 2015 से 2 जुलाई, 2017 तक चलनी है। मोदी शनि की साढ़ेसती से भी गुजर रहे हैं इसीलिए इस समय उन्होंने जोखिमपूर्ण नोटबंदी का फैसला ले लिया। शनि उन्हें धीमी रफ्तार से चलने की सलाह दे रहा है जबकि चंद्रमा उन्हें तेजी की तरफ ले जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी : भाजपा का लग्न मिथुन है तथा उसे सूर्य महादशा चल रही है। सूर्य दशम घर में है जोकि सत्ता को इंगित करता है। पार्टी की कुंडली के तीसरे घर में 4 ग्रह बैठे हुए हैं जबकि तीसरे घर का मालिक छठे में है। तीसरा घर पराक्रम का होता है। सूर्य दशा में ऐसा लगता है कि भाजपा अपनी मौजूदा स्थिति से नीचे गिरेगी। भाजपा नेता यह समझेंगे कि उनकी ताकत बढ़ रही है परंतु वह औंधे मुंह गिरेंगे। सूर्य तथा बुध का समय 6 जून, 2016 से 13 अप्रैल, 2017 तक चलना है। बुध नौवें घर में है परंतु वह नीच राशि के साथ-साथ केतु से ग्रसित है। इसलिए बुध भाजपा की लोकप्रियता को नीचे ले आएगा। उसके बाद सूर्य में केतु की अंतर्दशा 13 अप्रैल, 2017 से 19 अक्तूबर, 2017 तक रहेगी। यह समय भी भाजपा व उसके नेताओं के लिए हालात को खराब करेगा। पार्टी के भीतर मोदी की लीडरशिप को चुनौती मिलेगी। मोदी प्रधानमंत्री बने रहेंगे परंतु उनके खिलाफ बगावती सुर तेज हो जाएंगे।

कांग्रेस : कांग्रेस का जन्म लग्न मकर है। अब उसे बुध का समय 2 मई, 2017 तक चलना है। उसके बाद बृहस्पति में केतु की अंतर्दशा वर्षांत तक चलेगी इसलिए 2017 में कांग्रेस में उभार आएगा। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ङ्क्षचता का विषय रहेगा। आने वाले महीनों में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अहम भूमिका अदा करेंगे। अप्रैल के बाद पार्टी में उनकी बड़ी भूमिका रहेगी। अंतत: राहुल पार्टी के सुप्रीम नेता बन जाएंगे। 2017 में कांग्रेस अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल कर लेगी। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की कुंडली में शनि के कारण नीच भंग राजयोग बन रहा है। उनका असली समय 2019 में शुरू होना है। 2018 तक वह अपनी गलतियों से सबक लेंगे। आने वाले महीनों में राहुल गांधी की कुंडली मुलायम व उनके पुत्र से मैच करती है। नोटबंदी कांग्रेस तथा मायावती के लिए फायदेमंद सिद्ध होगी। उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए समाजवादी पार्टी आगे उभर कर आएगी। मायावती की स्थिति भी मजबूत रहेगी। कुल मिलाकर अखिलेश जीतेंगे। कांग्रेस के अच्छे दिनों की शुरुआत होगी।
साभार - पंजाब केसरी
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