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Tuesday, July 25, 2017

राष्ट्रपति भवन से जाते-जाते राष्ट्र के नाम पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का आखिरी संदेश

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन देश को संबोधन में कहा है कि भारत की आत्मा, बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है। भारत सिर्फ एक भौगोलिक सत्ता नहीं है। इसमें विचार, दर्शन, बौद्धिकता, शिल्प, नवान्वेषण और अनुभव का इतिहास है। संस्कृति, पंथ और भाषा की विविधता भारत को विशेष बनाती है। देश में गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की घटनाओं के बीच निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सहिष्णुता को भारतीय सभ्यता की नींव बताते हुए समाज को शारीरिक तथा मौखिक सभी तरह की हिंसा से मुक्त करने की जरूरत बताई है। मुखर्जी ने पदमुक्त होने से पहले राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए सहिष्णुता और हिंसा की शक्ति को पुनर्जागृत करने की जरूरत है।

मुखर्जी ने कहा 
"कि समावेशन समतामूलक समाज का आवश्यक आधार है। विकास में पिछड़ों और वंचितों की भागीदारी सुनिश्चित करना होगा। एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण सभी पंथ और धर्म के लिए समानता के भाव से होता है।"


राष्ट्रपति के पद से मुक्त होने की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रणब ने देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, सहृदयता और समानुभूति की क्षमता हमारी सभ्यता की सच्ची नींव है। आसपास होने वाली हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, हमें जन-संवाद को शारीरिक और मौखिक, सभी तरह की हिंसा से मुक्त करना होगा।

प्रणब ने कहा कि एक अहिंसक समाज ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के सभी वर्गों, विशेषकर पिछड़ों और वंचितों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है। हमें एक सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए अहिंसा की शक्ति को पुनर्जागृत करना होगा। राष्ट्रपति के तौर पर अपने आखिरी संदेश में प्रणब ने राष्ट्रपति के तौर पर किए कार्यों का भी जिक्र किया।

अपनी उम्र की तरफ इशारा करते हुए प्रणब ने कहा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, उसकी उपदेश देने की प्रवृति बढ़ती जाती है। पर मेरे पास कोई उपदेश नहीं है। उन्होंने कहा, पचास साल के सार्वजनिक जीवन के दौरान भारत का संविधान मेरा पवित्र ग्रंथ रहा और संसद मेरा मंदिर। हमेशा देश के लोगों की सेवा करने की अभिलाषा रही। राष्ट्रपति के तौर पर भी इसे निभाया।

नव निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बधाई देते हुए प्रणब ने कहा कि मैं भावी राष्ट्रपति का हार्दिक स्वागत करता हूं और उन्हें आने वाले वर्षों में सफलता और खुशहाली की शुभकामनाएं देता हूं।

आतंकियों पर दया नहीं
राष्ट्रपति रहते 34 दया याचिकाओं पर फैसला किया, जिनमें से 30 ठुकरा दीं और बाकी चार पर फैसला बदल दिया। इनमें अफजल गुरु और अजमल कसाब जैसे आंतकियों की याचिकाएं शामिल थीं, जिन्हें प्रणब के कार्यकाल में ही फांसी हुई।

अध्यादेशों पर नसीहत
संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट से पारित किसी अध्यादेश को नहीं लौटाया लेकिन सरकार को सलाह जरूर दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद कई बार नीतिगत मुद्दों पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे।

राज्यपाल को सलाह
2016 में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा की अनुशंसा पर वहां राष्ट्रपति शासन लगा। इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को गलत माना। इसके बाद एक सम्मेलन में प्रणब ने कहा, संवैधानिक पदों पर बैठे हम सभी लोगों का कर्तव्य है कि हम संविधान की पवित्रता को बनाए रखें।


बोलने की आजादी का समर्थन
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों में बोलने की आजादी को कुचल रही है। इस पर प्रणब ने सीधे सरकार को कुछ नहीं कहा। लेकिन बोलने के अधिकार का समर्थन करते हुए एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, भावी पीढ़ी हमसे जवाब मांगेगी। हमें अपने बुनियादी मूल्यों की रक्षा करनी होगी।

मोदी ने बताया पिता-तुल्य
प्रणब के बीते तीन साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रहे। अपने विदाई भाषण में उन्होंने कहा कि उनके प्रति विनम्र व्यवहार के लिए वह मोदी को हमेशा याद रखेंगे। इससे कुछ ही दिन पहले मोदी ने प्रणब को पिता के समान बताया था।

आधुनिक राष्ट्र निर्माण में सभी की भूमिका अहम
मुखर्जी ने कहा कि समावेशन समतामूलक समाज का आवश्यक आधार है। विकास में पिछड़ों और वंचितों की भागीदारी सुनिश्चित करना होगा। एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण सभी पंथ और धर्म के लिए समानता के भाव से होता है। विकास को वास्तविक बनाने के लिए यह जरूरी है कि सबसे गरीब व्यक्ति भी इसमें शामिल हो।

नए राष्ट्रपति को बधाई
इसी तरह उन्होंंने कहा, 'हमारे विश्वविद्यालय सिर्फ रटने वालों की जगह नहीं बनें बल्कि जिज्ञासू प्रवृत्ति के लोगों की जगह बने।' उन्होंने मंगलवार को शपथ ले रहे नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बधाई भी दी। साथ ही अपने कार्यकाल के बारे में कहा कि इस दौरान वे कितना सफल रहे यह इतिहास अपने निर्मम मापदंड से ही तय करेगा। संबोधन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन लोक भवन बन गया।
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Friday, April 14, 2017

Live: डिजिधन योजना: 1500 खर्च कर ये महिला बनी करोड़पति

नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को डिजिधन योजना( Digitization scheme) के विजेता का ऐलान किया। और इसकी विजेता महाराष्ट्र की श्रद्धा रहीं जिनको 1 करोड़ रुपये का इनाम मिला। उन्होंने मात्र 1500 रुपये का भुगतान किया था। केंद्र सरकार ने यह योजना बीते 25 दिसंबर को शुरू की थी। श्रद्धा मोहन महाराष्ट्र के लातूर की रहने वाली हैं, उनके पिता छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं.

25 दिसंबर 2016 को केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिये इन योजनाओं की शुरुआत की थी। केंद्र की ओर से लकी ग्राहक योजना और डिजिधन व्यापार योजना की शुरुआत हुई थी और डिजिधन व्यापार योजना के तहत 16 लाख लोगों ने लगभग 258 करोड़ रुपये जीते हैं।

डिजिधन व्यापार योजना के तहत इन्हें मिला इनाम
तमिलनाडु के वेस्ट तांबरम के जीआरटी ज्वैलर्स ने आईसीआईसीआई के जरिए महज 300 रुपये का भुगतान कर 50 लाख रुपये जीते. इसके तहत एमडी जीआर राधाकृष्णन ने किया पुरस्कार ग्रहण किया. उन्होंने इनाम में मिले पैसों को गंगा की सफाई के लिए दान किया. उनका बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने भी 50 लाख रुपये भी दान किये.

दूसरा पुरस्कार ठाणे की रागिनी राजेंद्र उत्तेकर को मिला. उन्होंने पीएनबी के जरिये महज 510 रुपये का भुगतान किया था. तो वहीं हैदराबाद के तीसरा पुरस्कार शेख रफी को मिला जिन्होंने 2000 रुपये का भुगतान किया था और उन्हें 12 लाख रुपये का इनाम मिला.

लकीग्राहक योजना के मेगा ड्रा के विजेताओं के नाम - 

पहला पुरस्कार श्रद्धा मोहन मैनशेट्टी

मोबाइल की किश्त चुकानेके लिए 1590 रुपये का भुगतान किया था, सेंट्रल बैंक के जरिए रुपये कार्ड से, लातूर महाराष्ट्र से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा है. पिता किराने की दुकान चलाते हैं

दूसरा पुरस्कार गुजरात के बैंक ऑफ बड़ोदा के रुपये कार्ड के जरिए 1100 रुपये के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर हार्दिक कुमार चिमनभाई प्रजापति को 50 लाख रुपये मिले. पेशे के शिक्षक हैं

तीसरा पुरस्कार भरत सिंह देहरादून उत्तराखंड के हैं 100 रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन किया, पीएनबी के जरिए किया था भुगतान. 37 साल के हैं, 9वीं तक पड़े हैं, कपड़े की दुकान में का करते हैं.

राष्ट्रपति ने किया था सम्मानित
इससे पहले हाल ही में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक ग्राहक को सरकार की डिजिटल भुगतान को लोकप्रिय बनाने की मुहिम का जबरदस्त लाभ हुआ है। उसके डिजिटल माध्यम से किए गए 1590 रुपये के भुगतान को लकी ड्रॉ योजना में एक करोड़ रुपये का इनाम मिला है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में डिजिटल भुगतान संवर्धन योजना के तहत इस प्रोत्साहन योजना का 100वां ड्रॉ निकालकर विजेताओं को चुना और इस इनामी योजना के छह विजेताओं में तीन ग्राहक और तीन दुकानदार शामिल हैं।
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